मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों के बैंक खातों में यूनिफॉर्म के लिए राशि भेजने के बजाय उन्हें सीधे सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश की गारमेंट्स इंडस्ट्री यूनिफॉर्म तैयार करेगी और छात्रों तक पहुंचाएगी।
खातों में नहीं आएंगे 600 रुपये
अब तक राज्य सरकार विद्यार्थियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये भेजती थी। वर्ष 2024-25 से यह व्यवस्था लागू थी। इससे पहले स्कूल यूनिफॉर्म स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सिलवाकर वितरित की जाती थी।
नई व्यवस्था के तहत नकद राशि की जगह सीधे रेडीमेड यूनिफॉर्म देने का निर्णय लिया गया है।
छात्रों और अभिभावकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर छात्रों और अभिभावकों की राय अलग-अलग है। कई छात्राओं का कहना है कि नकद राशि मिलने से वे अपनी पसंद और सही नाप के अनुसार यूनिफॉर्म खरीद सकती थीं। उनका मानना है कि तैयार यूनिफॉर्म में साइज से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
कुछ विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि राशि मिलने पर परिवार अतिरिक्त पैसे जोड़कर बेहतर गुणवत्ता की यूनिफॉर्म खरीद सकता था।
अभिभावकों ने बताई फैसले की वजह
वहीं कई अभिभावकों का मानना है कि विद्यार्थियों के खातों में भेजी जाने वाली राशि कई बार अन्य घरेलू जरूरतों में खर्च हो जाती थी, जिससे कुछ बच्चों के लिए नई यूनिफॉर्म बनवाना संभव नहीं हो पाता था। ऐसे में सरकार का यह कदम सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक छात्र को समय पर यूनिफॉर्म मिल सके।
कांग्रेस ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता Swadesh Sharma ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के खातों में राशि भेजने की व्यवस्था बंद कर सरकार ने यूनिफॉर्म वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नया रास्ता खोल दिया है।
उन्होंने कहा कि डीबीटी व्यवस्था पारदर्शी थी, जबकि केंद्रीकृत खरीद और वितरण प्रणाली में अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।
लाखों विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर
सरकार के इस फैसले का असर प्रदेश के लाखों सरकारी स्कूल विद्यार्थियों पर पड़ेगा। अब सभी छात्रों को एक समान डिजाइन और निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी। आने वाले समय में इस नई व्यवस्था की प्रभावशीलता और गुणवत्ता पर सभी की नजर रहेगी।