भोपाल | मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ICAR की CREAMS लैब के आंकड़ों के मुताबिक, पराली जलाने के मामलों में मध्य प्रदेश देश के टॉप-3 राज्यों में शामिल हो गया है। पंजाब और राजस्थान के बाद प्रदेश में सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं।
45 दिनों में पराली जलाने के 566 मामले
आंकड़ों के अनुसार, 1 नवंबर तक के 45 दिनों में मध्य प्रदेश में पराली जलाने के 566 मामले दर्ज किए गए। बताया गया है कि यह संख्या वर्ष 2025 की इसी अवधि के मुकाबले करीब 10 फीसदी ज्यादा है। धान की कटाई के बाद खेतों में फसल अवशेष जलाने का चलन तेजी से बढ़ा है।
श्योपुर में सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज
प्रदेश के जिलों में श्योपुर पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे रहा। यहां अब तक 70 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसके बाद गुना, नर्मदापुरम और दतिया का स्थान है।
जिलेवार आंकड़े इस प्रकार हैं:
- श्योपुर: 70 मामले
- गुना: 45 मामले
- नर्मदापुरम: 41 मामले
- दतिया: 38 मामले
- सीहोर: 37 मामले
- उज्जैन: 33 मामले
पराली जलाने से बढ़ सकती है प्रदूषण की समस्या
धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को जलाने से धुआं और प्रदूषक तत्व हवा में फैलते हैं। इससे वायु गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और लोगों को सांस संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश में बढ़ते मामलों ने पराली प्रबंधन और किसानों को फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।