रायपुर | महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) सट्टेबाजी मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस नेटवर्क के मुख्य प्रमोटरों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम उसे लेकर भारत पहुंची। अब उसे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। चंद्राकर के खिलाफ दो CBI मामलों में चार्जशीट दाखिल है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में अभियोजन शिकायत दर्ज की जा चुकी है। सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। ED की जांच के मुताबिक, उसने रवि उप्पल के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया और बाद में दुबई से इसका संचालन किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए देश-विदेश में ऑनलाइन दांव लगवाए गए और कमाई को फर्जी बैंक खातों, हवाला तथा विदेशी कंपनियों के माध्यम से इधर-उधर किया गया।
भिलाई की जूस दुकान से शुरू हुआ सफर
जांच में सामने आए दस्तावेजों और बयानों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के परिवार का भिलाई में ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से जूस की दुकान थी। सौरभ भी इस दुकान पर काम करता था। उसके चाचा के बयान के अनुसार, उसे हर महीने करीब 15 हजार रुपये मिलते थे। जांच एजेंसी के सामने आए बयानों के मुताबिक, दिसंबर 2020 तक सौरभ छोटे स्तर पर सट्टेबाजी के काम से जुड़ा हुआ था। इसके बाद महादेव ऑनलाइन बुक का कारोबार तेजी से बढ़ा और कथित तौर पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी नेटवर्क में बदल गया।
दुबई से चलता था महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क
ED की जांच के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक का मुख्य संचालन दुबई से किया जाता था। क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन दांव लगवाने के लिए अलग-अलग ऑपरेटरों को पैनल दिए जाते थे। जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, एक पैनल लेने के लिए ऑपरेटर को शुरुआत में करीब 15 से 20 लाख रुपये देने पड़ते थे। इसके बाद बैंक खाते, मोबाइल फोन, इंटरनेट कनेक्शन और कर्मचारियों की व्यवस्था उसे खुद करनी होती थी। खिलाड़ियों को जोड़ने के लिए WhatsApp, Telegram, सोशल मीडिया और कॉल सेंटर का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। लोगों को बोनस और बड़े मुनाफे का लालच देकर सट्टेबाजी में शामिल किया जाता था। ED के अनुमान के मुताबिक, भारत और UAE में करीब 3,200 पैनल काम कर रहे थे। पैनलों से होने वाले मुनाफे का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा दुबई स्थित मुख्य नेटवर्क तक पहुंचाए जाने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि बड़े दांव जीतने वाले कुछ खिलाड़ियों की यूजर आईडी बंद कर दी जाती थी, जिससे वे अपनी रकम नहीं निकाल पाते थे।
अलग-अलग प्लेटफॉर्म से हजारों करोड़ की कमाई का अनुमान
ED के दस्तावेजों में महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े दूसरे प्लेटफॉर्म के कारोबार को लेकर बड़े वित्तीय अनुमान दर्ज हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक:
- महादेव ऑनलाइन बुक: करीब 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये
- स्काई एक्सचेंज: करीब 11 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये
- लोटस365: करीब 2,400 करोड़ रुपये
इन आंकड़ों के आधार पर कुल रकम करीब 88 हजार से 94 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि करीब 4 हजार से 5 हजार करोड़ रुपये भारत से बाहर UAE में बैठे संचालकों तक पहुंचाए गए। यहां यह समझना जरूरी है कि ये जांच में बताए गए कारोबार या लेनदेन के अनुमान हैं। इन्हें सीधे तौर पर शुद्ध मुनाफा, जब्त रकम या अदालत में साबित अपराध की राशि नहीं माना जाना चाहिए।
फर्जी बैंक खातों और हवाला से रकम विदेश भेजने का आरोप
ED के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिले पैसों को छिपाने के लिए दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले गए। कुछ खाते कथित तौर पर धोखे से प्राप्त पहचान पत्रों के आधार पर खोले गए, जबकि कुछ खातों का इस्तेमाल कमीशन देकर किया गया। इन खातों में खिलाड़ियों से मिली रकम जमा होती थी। इसके बाद कई स्तरों पर लेनदेन कर पैसा अलग-अलग खातों और स्थानों तक पहुंचाया जाता था। कुछ रकम नकद निकाली गई और हवाला के जरिए विदेश भेजे जाने का आरोप है। जांच में दुबई की कंपनियों, विदेश में खरीदी गई संपत्तियों और भारतीय शेयर बाजार में निवेश के संकेत भी मिले। ED का आरोप है कि कथित सट्टेबाजी की कमाई को वैध कारोबार से हुई आय दिखाने के लिए कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
UAE में शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप
सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह में हरशिता से शादी हुई थी। शादी के कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी के बीच आयोजित किए गए थे। ED के मुताबिक, इस शादी पर करीब 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए। जांच एजेंसी के दस्तावेजों में शादी के आयोजन, होटल, मेहमानों की यात्रा और विमान सेवाओं से जुड़े कई खर्चों का जिक्र है। मेहमानों को लाने के लिए चार्टर्ड और निजी विमानों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई थी। दस्तावेजों में आयोजन से जुड़े एक खर्च रिकॉर्ड में करीब 112.05 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात कही गई है। इसके अलावा होटल पर करीब 42 करोड़ रुपये, मेहमानों के टिकट, होटल और वीजा पर करीब 37 करोड़ रुपये तथा विमान सेवाओं पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। ये अलग-अलग रिकॉर्ड में दर्ज रकम हैं। इन्हें जोड़कर शादी का कुल खर्च नहीं माना जा सकता। ED ने संबंधित रिकॉर्ड और बयानों के आधार पर कुल खर्च करीब 200 करोड़ रुपये आंका है। शादी में बॉलीवुड और टीवी जगत की कुछ हस्तियों के शामिल होने या प्रस्तुति देने की खबरें भी सामने आई थीं। कुछ लोगों को ED ने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था। हालांकि, किसी व्यक्ति को समन जारी होना अपने आप में उसके अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है।
परिवार और करीबी लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में
ED की जांच में सौरभ चंद्राकर के बड़े भाई गितेश चंद्राकर और अन्य रिश्तेदारों के नाम भी सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, गितेश दुबई में रहकर महादेव से जुड़े काम और दूसरे सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म संभालता था। जांच में अन्ना रेड्डी, लेजर बुक, फेयर प्ले और अंबानी बुक जैसे नामों का भी उल्लेख किया गया है। सौरभ के पिता रामेश्वर प्रसाद चंद्राकर के भिलाई स्थित घर और परिवार के कारोबार से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गई थी। उसके ससुराल पक्ष से जुड़े ठिकानों की भी जांच हुई। हालांकि, परिवार का सदस्य होना या किसी के घर पर तलाशी होना किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं करता। संबंधित लोगों की भूमिका का निर्धारण जांच में मिले साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया से होगा।
भूपेश बघेल के नाम को लेकर भी लगे आरोप
महादेव ऑनलाइन बुक मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी जांच के दौरान सामने आया। ED और अन्य जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में आरोप लगाया गया कि सट्टेबाजी नेटवर्क को चलाने के लिए कुछ अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक कथित तौर पर पैसे पहुंचाए गए। जांच में पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक चंद्रभूषण वर्मा, पैनल ऑपरेटर सतीश चंद्राकर और हवाला कारोबार से जुड़े अनिल तथा सुनील दम्मानी के बयानों का उल्लेख है। दस्तावेजों के मुताबिक, सतीश चंद्राकर ने दावा किया कि 2021 से 2023 के बीच करीब 81 करोड़ रुपये अलग-अलग लोगों और ठिकानों तक पहुंचाए गए।
2 नवंबर 2023 को ED ने रायपुर में आसिम दास से जुड़े ठिकानों और एक वाहन से करीब 5.39 करोड़ रुपये नकद बरामद करने की जानकारी दी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर कुछ राजनीतिक लोगों तक पहुंचाई जानी थी। शुभम सोनी के एक ईमेल में भी राजनीतिक लोगों को कथित भुगतान का दावा किया गया था। इसमें भूपेश बघेल का नाम लेकर करीब 508 करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप लगाया गया। इन आरोपों की जांच CBI और ED कर रही हैं। भूपेश बघेल का नाम FIR या किसी आरोपी के बयान में आने से आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते।
14 गिरफ्तारियां और कई आरोपियों को जमानत
ED के दस्तावेजों के मुताबिक, अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पुलिसकर्मी, पैनल ऑपरेटर, हवाला कारोबारी, दुबई में काम करने वाले मैनेजर और शेयर बाजार में निवेश से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, दम्मानी बंधुओं, आसिम दास और नितीश दीवान समेत कई आरोपियों को अलग-अलग अदालतों से जमानत मिल चुकी है। वहीं कारोबारी विकास गर्ग को जुलाई 2026 में गिरफ्तार किए जाने की बात दस्तावेजों में दर्ज है। जांच एजेंसी ने इस मामले में मुख्य शिकायत और पांच अतिरिक्त शिकायतें दाखिल की हैं। इनमें कुल 116 आरोपियों के नाम शामिल बताए गए हैं।
अमेरिकी कंपनी Ebix Inc. तक पहुंची जांच
ED की जांच ऑनलाइन सट्टेबाजी से आगे बढ़कर कथित कमाई के निवेश तक पहुंची। एजेंसी ने स्काई एक्सचेंज के संचालक हरि शंकर तिबरेवाल और उससे जुड़ी विदेशी कंपनियों के जरिए भारतीय शेयर बाजार में निवेश किए जाने का आरोप लगाया। जांच विकास गर्ग और उससे जुड़ी कंपनियों तक भी पहुंची। ED के मुताबिक, विदेश से आई रकम का इस्तेमाल अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Ebix Inc. को खरीदने में भी किया गया। दस्तावेजों के अनुसार, विकास गर्ग और उससे जुड़ी कंपनियों के खातों में करीब 940.77 करोड़ रुपये की कथित अपराध से प्राप्त रकम पहुंची। इसमें करीब 765.77 करोड़ रुपये हरि शंकर तिबरेवाल से जुड़ी विदेशी कंपनियों से आने का आरोप है। ED ने जून 2026 में करीब 941 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश दिया था। यह कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। अस्थायी जब्ती आदेश को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
करीब 3,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कार्रवाई
ED के दस्तावेजों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक मामले में अब तक 11 अस्थायी संपत्ति जब्ती आदेश जारी किए गए हैं। इन आदेशों में दर्ज रकम और संपत्तियों के मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर कुल संपत्तियों का मूल्य करीब 3,500 करोड़ रुपये बताया गया है। इनमें लगभग 1,800 करोड़ रुपये की संपत्तियां विदेश में और करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां भारत में होने का दावा है। दुबई में 22 अचल संपत्तियों की पहचान किए जाने की बात भी सामने आई है। इनमें सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों से जुड़ी 12 संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,500 करोड़ रुपये बताया गया है। इन संपत्तियों में घर, विला, जमीन, बैंक खाते, शेयर और अन्य परिसंपत्तियां शामिल बताई गई हैं। ED के मुताबिक, इनमें से सात जब्ती आदेशों को संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी मिली है। मार्च 2026 में ED ने दुबई और दिल्ली में करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की अलग कार्रवाई की जानकारी भी दी थी।
ओमान से प्रत्यर्पण के बाद अब रायपुर में होगी कानूनी कार्रवाई
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ ED ने सितंबर 2023 में गैर-जमानती वारंट हासिल किया था। नवंबर 2023 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड नोटिस जारी किया। इसके बाद उसकी तलाश और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। CBI के मुताबिक, चंद्राकर को इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर ओमान में खोजा गया और वहां की रॉयल ओमान पुलिस ने हिरासत में लिया। भारत की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध भेजे जाने के बाद CBI की विशेष टीम उसे भारत लेकर आई। अब उसे रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। चंद्राकर दो CBI मामलों में आरोपी है, जिनमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इसके अलावा ED के मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है। ED की विशेष PMLA अदालत ने 19 जनवरी 2024 को मुख्य शिकायत पर संज्ञान लिया था और चंद्राकर को आरोपी नंबर A-1 बनाया गया था।
अब जांच में खुल सकते हैं नेटवर्क से जुड़े नए राज
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को महादेव ऑनलाइन बुक मामले की जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। एजेंसियां अब उससे कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, विदेशी कंपनियों, हवाला के रास्तों, बैंक खातों और निवेश से जुड़े सवालों पर पूछताछ कर सकती हैं। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू रवि उप्पल की भूमिका भी है। जांच एजेंसियां उसके प्रत्यर्पण की दिशा में भी प्रयास कर रही हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में ED और CBI के आरोपों तथा अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। सौरभ चंद्राकर समेत सभी आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।