भोपाल: सतना जिले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने सेवा सहकारी समिति अमकुई के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ कार्रवाई की है। EOW ने आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में कथित गड़बड़ी के मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। जांच में आरोपी की वैध आय की तुलना में 426 प्रतिशत अधिक संपत्ति और व्यय का पता चला है। छापेमारी और सत्यापन के दौरान जमीन के दस्तावेज, सोने के आभूषण, बैंक खातों और बीमा पॉलिसियों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।
आय से 426% अधिक संपत्ति मिलने का दावा
EOW की जांच के अनुसार, जनवरी 2007 से सितंबर 2025 तक आरोपी की कुल वैध आय 17 लाख 51 हजार 50 रुपये आंकी गई है। वहीं, इस अवधि में 57 लाख 68 हजार 622 रुपये का व्यय सामने आया।इसके अलावा, 22.50 लाख रुपये के जमीन संबंधी दस्तावेज और 11.97 लाख रुपये के सोने के आभूषणों की जानकारी मिली है। इन सभी को मिलाकर कुल 92 लाख 16 हजार 174 रुपये की संपत्ति और व्यय का पता चला है। यह राशि आरोपी की ज्ञात वैध आय से 426 प्रतिशत अधिक है।
छापेमारी में बैंक खाते, बीमा पॉलिसी और मकान की जानकारी
EOW की छापेमारी और सत्यापन के दौरान आरोपी के छह बैंक खातों और छह बीमा पॉलिसियों की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही नागोद क्षेत्र में करीब 2,200 वर्गफीट में बने पक्के मकान, महंगे वाहनों और अन्य संपत्तियों की भी जांच की गई है। आरोपी के बेटे की दिल्ली में पढ़ाई पर हुए खर्च की भी पड़ताल कर रही है। बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अन्य संपत्तियों से संबंधित जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है, ताकि आरोपी की आय और खर्च के बीच अंतर का पता लगाया जा सके।
खाद वितरण में कालाबाजारी और धोखाधड़ी के आरोप
EOW ने आरोपी के खिलाफ दूसरा मामला सेवा सहकारी समिति अमकुई में खाद वितरण में कथित अनियमितताओं, कालाबाजारी और धोखाधड़ी को लेकर दर्ज किया है।जांच के मुताबिक, शासन द्वारा निर्धारित 593 रुपये प्रति क्विंटल की दर वाली यूरिया खाद किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचे जाने का आरोप है। निर्धारित दर से अधिक राशि वसूले जाने के मामले की जांच की जा रही है।
194 किसानों के रिकॉर्ड में 122 नाम फर्जी मिलने का दावा
जांच के दौरान POS मशीन के रिकॉर्ड में कुल 194 किसानों का विवरण दर्ज पाया गया। इनमें से 122 किसानों के नाम कथित तौर पर फर्जी पाए गए हैं। आरोप है कि इन नामों का इस्तेमाल खाद की कालाबाजारी करने के लिए किया गया।इसके अलावा, वास्तविक किसानों के परमिट और रसीदों की कार्बन प्रतियों में काट-छांट कर यूरिया और डीएपी की 10 से 20 बोरी तक अतिरिक्त बिक्री दर्ज किए जाने का भी आरोप है। EOW के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर फर्जी स्टॉक रजिस्टर तैयार किए गए।
EOW ने दो अलग-अलग FIR दर्ज कीं
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।
FIR नंबर 110/2026: आय से अधिक संपत्ति का मामला।
FIR नंबर 111/2026: खाद वितरण में कथित भ्रष्टाचार, कालाबाजारी और धोखाधड़ी का मामला।
दोनों मामलों में जांच जारी है। EOW बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों, संपत्तियों और खाद वितरण से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, खाद वितरण में गड़बड़ी और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों की जांच जारी है।