बैंकों में आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी प्रणालियों में अब तक लाभार्थी के खाते का नाम वेरीफाई करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। धनराशि केवल खाता नंबर और आईएफएससी कोड के आधार पर भेजा जाता था। इससे गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने की आशंका बनी रहती थी।
अब वेरिफिकेशन की सुविधा से ग्राहकों को लाभ होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस समस्या को सुलझाने के लिए एक पहल की है। अब आरटीजीएस (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) के माध्यम से पैसे भेजने से पहले, भेजने वाले को लाभार्थी के खाते का नाम वेरीफाई करने की सुविधा मिलेगी। यह कदम डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा। धोखाधड़ी को रोकने में भी मदद करेगा।
बैंकों में आरटीजीएस और एनईएफटी जैसी प्रणालियों में अब तक लाभार्थी के खाते का नाम वेरीफाई करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। धनराशि केवल खाता नंबर और आईएफएससी कोड के आधार पर भेजा जाता था। इससे गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने की आशंका बनी रहती थी।
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