अफगानिस्तान में आए भूकंप की तीव्रता 4.5 दर्ज की गई है। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप 1 जनवरी 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 11:43:52 बजे आया। इसका केंद्र जमीन से 113 किलोमीटर की गहराई पर था और यह 36.49 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 71.35 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अभी तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ दिनों में तीसरा झटका, बढ़ी चिंता
इससे पहले 29 दिसंबर को 4.1 तीव्रता और 27 दिसंबर को 4.0 तीव्रता के भूकंप भी इसी क्षेत्र में दर्ज किए गए थे। कुछ ही दिनों में लगातार आए इन झटकों ने स्थानीय लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम तीव्रता के भूकंप भी कभी-कभी बड़े भूकंपों के संकेत हो सकते हैं, इसलिए स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
हिंदूकुश क्षेत्र—भूकंपीय रूप से सबसे सक्रिय इलाकों में शामिल
अफगानिस्तान का हिंदूकुश क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में गिना जाता है। रेड क्रॉस के अनुसार, यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के प्रभाव क्षेत्र में आता है। प्लेटों के निरंतर दबाव और खिंचाव के कारण यहाँ बार-बार भूकंप आते रहते हैं। अक्सर भूकंप की तीव्रता कम होती है, लेकिन कभी-कभी ये विनाशकारी रूप भी ले सकते हैं।
कमजोर ढाँचा और संघर्ष—आपदाओं के प्रति और संवेदनशील बनाता है देश
संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी UNOCHA ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से जारी संघर्ष, कमजोर बुनियादी ढाँचे और सीमित संसाधनों के कारण अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। कई इलाकों में सुरक्षित आवास, मजबूत निर्माण और आपदा-प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण मामूली झटकों से भी लोगों का जीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बार-बार आने वाले भूकंप वहाँ के नागरिकों के लिए अतिरिक्त खतरा बनते जा रहे हैं।
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