ताबड़तोड़ चल रहा बैठकों का दौर
अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि आखिर एक साल में ऐसा क्या हुआ कि नीतीश के लिए दरवाजे बंद करने वाली BJP उनके स्वागत के लिए तैयार हो गई? किन शर्तों के साथ BJP नीतीश कुमार को अपने साथ लाएगी। क्या बिहार में एक बार फिर से BJP नीतीश कुमार की ताजपोशी करने की तैयारी कर रही है? सूत्रों की मानें तो BJP का पूरा का पूरा नेतृत्व पिछले 48 घंटों से इन्हीं सवालों को सुलझाने की कोशिश में जुटा है। पहले आनन-फानन में बिहार BJP की कोर कमेटी के मेंबर को दिल्ली बुलाया गया। यहां प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के आवास पर आधे घंटे की मीटिंग चली। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर लगभग 95 मिनट का मंथन हुआ। जेपी नड्डा और अमित शाह के साथ अलग मीटिंग भी की। आइये आपको बताते हैं कि बीजेपी के इस बड़े कदम के पीछे लोकसभा चुनाव को लेकर क्या रणनीति छिपी हुई हैसबसे पहले 2 पॉइंट में समझते हैं कि नीतीश कुमार के लिए दरवाजे क्यों खुले
1. BJP चुनाव से पहले I.N.D.I.A. गठबंधन (Nitish Kumar) को खत्म करना चाहती है: पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मानें तो लोकसभा चुनाव में BJP के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीतीश कुमार ही पेश कर रहे थे। विपक्ष के बिखरे कुनबे को एक मंच पर लाने का श्रेय नीतीश कुमार को जाता है। ये नीतीश कुमार ही थे जिन्होंने सबसे पहले कांग्रेस को गठबंधन के लिए तैयार किया। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश, बंगाल, दिल्ली,महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु जैसे राज्यों का ताबड़तोड़ दौरा किया। उन्होंने ममता बनर्जी और अखिलेश यादव को कांग्रेस के साथ आने के लिए राजी किया। जुलाई 2023 में वे ही पटना में BJP विरोधी नेताओं को औपचारिक तौर पर एक प्लेटफॉर्म पर लाए।
जानें क्या है बीजपी की रणनीति
नीतीश कुमार देशभर की 400 लोकसभा सीटों पर BJP के खिलाफ वन वर्सेज वन कैंडिडेट उतारने के फॉर्मूले पर काम कर रहे थे। उनका सबसे ज्यादा फोकस बिहार की 40, UP की 80, झारखंड की 14, और बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर BJP को पटखनी देनी की थी। दरअसल, भाजपा ये भी जानती थी कि अगर विपक्ष का ये फॉर्मूला कामयाब होता तो BJP को लोकसभा चुनाव में मिशन 400 को बड़ा झटका लग सकता था। ऐसे में नीतीश अगर NDA में शामिल हो जाते हैं तो I.N.D.I.A का कुनबा लगभग पूरी तरह बिखर जाएगा। ममता बनर्जी बंगाल में, अखिलेश यादव UP में और आप पंजाब में पहले ही अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।पूरी हिंदी पट्टी में नीतिश कुमार की पकड़
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि कांग्रेस के अलावा नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ही एक ऐसे नेता हैं, जिनकी पकड़ पूरी हिंदी पट्टी में है। इतना ही नहीं, नीतीश का संबंध देश की सभी क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं से भी बेहतर हैं। नीतीश के अलावा I.N.D.I.A गठबंधन में किसी नेता की इतनी पकड़ नहीं है कि वे सभी पार्टियों के साथ समन्वय स्थापित कर सकें।2. नीतीश कुमार मतलब 16% वोट की गारंटी, ये BJP भी जानती है: नीतीश कुमार की ताकत को भाजपा से ज्यादा बेहतर तरीके से कोई दल नहीं जानता। 2014 लोकसभा चुनाव को छोड़कर कभी भी नीतीश कुमार का वोट प्रतिशत 22% से नीचे नहीं रहा है। नीतीश को 2014 की मोदी लहर में भी 16% वोट मिले थे। नीतीश का प्रभाव केवल बिहार तक सीमित नहीं है। वे पड़ोसी राज्य झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी असर डाल सकते हैं।
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