मुंबई. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित 8वां वेतन आयोग एक्शन मोड में है। वेतन आयोग की ओर से लगातार बैठकें की जा रही हैं। इसी कड़ी में एक बैठक मुंबई में होने वाली है। वेतन आयोग की लगभग हर बैठक में केंद्रीय सरकारी कर्मचारी यूनियनें 3 से ज्यादा के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2 दिन तक चलने वाली मुंबई बैठक में मुख्य रूप से केंद्रीय सरकारी कर्मचारी यूनियनों की उस मांग पर चर्चा होने की संभावना है, जिसमें वेतन और पेंशन को 3.8 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल करके संशोधित करने की बात कही गई है। कर्मचारी संगठनों की मांग के मुताबिक फिटमेंट फैक्टर को गणना के आधार पर वास्तविक वेतन वृद्धि करीब 140 फीसदी बैठती है।
7वें आयोग से तुलना
बता दें कि 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी। फिटमेंट फैक्टर दो तरह से काम करता है। दरअसल, यह जमा हुए महंगाई भत्ते यानी डीए को मूल वेतन में मिला देता है। इसके अलावा, जो भी बढ़ोतरी होती है उसे ही वेतन में वास्तविक वृद्धि माना जाता है। 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट से यह बात स्पष्ट हो जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2.57 के फिटमेंट फैक्टर में से 2.25 का इस्तेमाल केवल उस समय जमा हुए 125 प्रतिशत महंगाई भत्ते को शामिल करने के लिए किया गया था। हालांकि, असल बढ़ोतरी काफी कम यानी 14.3 प्रतिशत रही। वेतन आयोगों के इतिहास में यह अब तक की सबसे कम वास्तविक वेतन वृद्धि थी।
पिछले आयोगों में हुई वृद्धि
तीसरे वेतन आयोग ने 20.6 प्रतिशत की वृद्धि की थी। वहीं, चौथे वेतन आयोग में 27.6 प्रतिशत, पांचवें में 31 प्रतिशत और छठे वेतन आयोग में 54 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई थी। इन आंकड़ों से साफ है कि 7वें आयोग में वास्तविक वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही। अब 8वें आयोग में कर्मचारी संगठन उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक वेतन वृद्धि अधिक हो। मुंबई बैठक में इन मांगों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। यूनियनें पेंशन संशोधन को भी इसी फॉर्मूले से जोड़ने की बात कह रही हैं।
3.8 फिटमेंट पर संभावित बढ़ोतरी
केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 फीसदी की दर से डीए मिल रहा है। अगर कर्मचारी संगठनों की मांग के मुताबिक 3.833 फिटमेंट फैक्टर को गणना के आधार पर वास्तविक वेतन वृद्धि करीब 140 फीसदी बैठती है। यह 7वें वेतन आयोग के तहत मिली 14.3 फीसदी की वास्तविक बढ़ोतरी से लगभग दस गुना अधिक है। उच्च फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर मूल वेतन में उल्लेखनीय उछाल आएगा। कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आयोग अभी मांगों पर विचार कर रहा है।
मुंबई बैठक का महत्त्व
दो दिन तक चलने वाली मुंबई बैठक में यूनियनों की मांगों को प्रमुखता मिलने की संभावना है। फिटमेंट फैक्टर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठन लगातार 3 से अधिक के फैक्टर की वकालत कर रहे हैं। आयोग की बैठकों में इन मुद्दों पर खुली चर्चा हो रही है। वेतन और पेंशन दोनों को संशोधित करने की मांग जोर पकड़ रही है। बैठक के नतीजों से भविष्य की सिफारिशों की दिशा तय हो सकती है। केंद्रीय कर्मचारी इस बैठक पर नजर रखे हुए हैं।
फिटमेंट फैक्टर की गणना का तरीका
फिटमेंट फैक्टर महंगाई भत्ते को मूल वेतन में समायोजित करने के साथ वास्तविक वृद्धि भी सुनिश्चित करता है। 7वें आयोग में जमा डीए को शामिल करने के बाद वास्तविक बढ़ोतरी सीमित रह गई थी। अब यूनियनें चाहते हैं कि नया फैक्टर अधिक वास्तविक लाभ दे। 3.8 के आसपास के फैक्टर से वेतन में 140 प्रतिशत तक की वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है। यह अनुमान कर्मचारी संगठनों के गणना के आधार पर है। आयोग अंतिम फैसला अपनी सिफारिशों में लेगा। कर्मचारियों की उम्मीदें इस चर्चा से जुड़ी हैं।
कर्मचारियों की उम्मीदें और आगे की राह
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे को नई दिशा देंगी। उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग को लेकर चर्चा तेज है। मुंबई बैठक इस दिशा में महत्त्वपूर्ण साबित हो सकती है। पिछले आयोगों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी संगठन बेहतर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने तक मांग और चर्चा का सिलसिला जारी रहेगा। वेतन वृद्धि से न केवल कर्मचारियों को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।