नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी छोड़ चुके के अन्नामलाई ने अब कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने कहा कि वह कभी भी सीजेपी का समर्थन नहीं करते हैं। हाल ही में उन्होंने सवाल उठाने को लेकर सीजेपी का समर्थन किया था लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट रूप से दूरी बना ली है। अन्नामलाई जून में भाजपा से इस्तीफा दे चुके हैं। वे तमिलनाडु में पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के नाते दक्षिण भारत में भाजपा के पोस्टर बॉय के रूप में उभरे थे। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।
CJP को लेकर नया बयान
गुरुवार को अन्नामलाई ने कहा कि हमने कभी भी कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन नहीं किया है। उनका एजेंडा अलग है हमारा एजेंडा अलग है। इस बयान के साथ उन्होंने साफ कर दिया कि वे CJP के साथ किसी भी तरह से नहीं जुड़ना चाहते। पहले के समर्थन भरे बयान के बाद यह यू-टर्न अप्रत्याशित माना जा रहा है। अन्नामलाई ने जोर देकर कहा कि दोनों के उद्देश्य और तरीके अलग-अलग हैं। उनके इस रुख से CJP को झटका लग सकता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके स्वतंत्र रुख को बनाए रखने की कोशिश मान रहे हैं।
पहले क्या कहा था अन्नामलाई
इससे पहले अन्नामलाई ने कहा था कि हो सकता है कि वे CJP के तौर-तरीकों या विरोध प्रदर्शन के ढंग से सहमत न हों लेकिन जो सवाल वे उठाना चाहते हैं उस मामले में वे पूरी तरह से समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा था कि गिरफ्तार करके जेल में डालने से CJP के नेता और भी मजबूत होंगे। साथ ही उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को SIR पर सवाल पूछने का अधिकार बताया था। इन बयानों के बाद अब उनका नया रुख बिल्कुल उलटा दिख रहा है। पहले का समर्थन और अब की दूरी के बीच का अंतर साफ है।
भाजपा से इस्तीफे के बाद की स्थिति
अन्नामलाई ने जून में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। पूर्व आईपीएस अधिकारी के रूप में वे तमिलनाडु भाजपा के चेहरे बने थे। पार्टी छोड़ने के बाद वे कई मुद्दों पर स्वतंत्र रुख अपना रहे हैं। केंद्र सरकार पर भी उन्होंने सवाल उठाए थे। एक पोस्ट में उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार यह भूल जाती है कि वह दिल्ली में 12 साल से अधिक समय से सत्ता में है और खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए हर समय एक दुश्मन पैदा करती है। उन्होंने इसे तरस योग्य बात बताया था। पार्टी से बाहर निकलकर वे अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में दिख रहे हैं।
केंद्र सरकार पर उठाए गए सवाल
अन्नामलाई ने सीजेपी के प्रदर्शन को देशविरोधी और विदेशी फंडिंग से संचालित बताने के आरोपों को भी खारिज कर दिया था। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि सत्ता में लंबे समय तक रहने के बावजूद दुश्मन पैदा करने की प्रवृत्ति गलत है। उनके इन बयानों ने भाजपा में नाराजगी पैदा की थी। अब CJP से दूरी बनाकर वे संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में उनके बयानों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वे विपक्षी और सत्ताधारी दोनों पक्षों से अलग रहने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक निहितार्थ और आगे की राह
अन्नामलाई के इस यू-टर्न से तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा छिड़ गई है। CJP के लिए यह झटका माना जा रहा है क्योंकि एक प्रमुख आवाज का समर्थन वापस ले लिया गया। भाजपा समर्थक इसे सकारात्मक मान सकते हैं जबकि विपक्षी दल इसे अवसरवादी रुख बता सकते हैं। अन्नामलाई अब स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने पर जोर दे रहे हैं। उनके अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं। तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व आईपीएस अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। पूरा प्रकरण राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।