नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने खुलासा किया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी है। उन्होंने बताया कि ऐसे हालात से निपटने के लिए ITBP की नई विशेष लड़ाकू इकाई ‘शौर्य कमांडो’ ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। यह बयान भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा तैयारियों को लेकर अहम माना जा रहा है।
अरुणाचल में कई जगहों पर आमने-सामने भारतीय और चीनी सैनिक
ITBP प्रमुख के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में सीमा के कई इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी है।
रिपोर्टों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के तवांग से आगे के सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दावे और धारणाएं तनाव का कारण बनती रही हैं। हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम के सभी स्थानीय विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं।
क्या हैं शौर्य कमांडो, सीमा पर क्यों है इनकी तैनाती?
ITBP ने सीमावर्ती इलाकों में अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘शौर्य कमांडो’ नाम की विशेष लड़ाकू टीम तैयार की है। इस इकाई को कठिन पहाड़ी परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण हालात का सामना करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
ITBP महानिदेशक ने बताया कि इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ जारी आमने-सामने की परिस्थितियों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। योजना है कि सीमा पर तैनात ITBP की प्रत्येक बटालियन में इस विशेष टीम को शामिल किया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर जवान तेजी से और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें।
गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए नया ‘स्ट्राइक’ कोर्स
सीमा पर बदलती चुनौतियों को देखते हुए ITBP ने जवानों के प्रशिक्षण के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया कोर्स तैयार किया है। इसका उद्देश्य गलवान घाटी जैसी हिंसक झड़पों की स्थिति में जवानों की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।
ITBP प्रमुख के अनुसार, इस प्रशिक्षण के जरिए पूरे बल की क्षमताओं को बेहतर बनाया जाएगा। योजना के तहत 2027 के अंत तक सभी जवानों को इस प्रशिक्षण से गुजारने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। उस घटना के बाद से दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, बुनियादी ढांचे और सैन्य तैयारियों पर विशेष जोर दिया है।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक पर ITBP का जोर
आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ITBP अपनी तकनीकी क्षमताओं को भी मजबूत कर रही है। महानिदेशक ने बताया कि बल की सभी सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की गई हैं। जवानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और ड्रोन तैयार करने की दिशा में भी काम हो रहा है।
उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सैन्य क्षमताओं और तकनीक को आधुनिक बनाया है। ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों से मुकाबला करना पर्याप्त नहीं होगा। ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियां सीमा की निगरानी, खतरे की पहचान और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ITBP के आधुनिकीकरण की एक बड़ी योजना को भी मंजूरी के लिए सैद्धांतिक सहमति मिली है। प्रस्तावित 4,000 करोड़ रुपये की योजना में से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर खर्च करने के लिए निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
सीमा पर बनाए जा रहे भूमिगत बंकर
सीमा पर जवानों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ITBP भूमिगत आश्रय और बंकर बनाने पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य संभावित संघर्ष की स्थिति में जवानों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है। आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर बनी इमारतों के निशाना बनने की आशंका को देखते हुए इस तरह के ढांचे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, अत्यधिक ठंड वाले इलाकों में तैनात जवानों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ITBP ने बैरकों को ठंड से बचाने के लिए इन्सुलेशन, दूरदराज की चौकियों पर बिजली की उपलब्धता और सौर ऊर्जा से पानी गर्म करने जैसी सुविधाओं पर काम किया है।
भारत-चीन सीमा पर ITBP की अहम भूमिका
वर्ष 1962 में स्थापित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस भारत-चीन सीमा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह बल करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा की निगरानी करता है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात ITBP के जवान सीमा पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
ITBP प्रमुख का ताजा बयान स्पष्ट करता है कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा संबंधी चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ऐसे में शौर्य कमांडो, ड्रोन तकनीक, आधुनिक प्रशिक्षण और सुरक्षित बुनियादी ढांचे के जरिए बल अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है।