नई दिल्ली में सामने आई एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने भारत में स्तन कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। वर्ष 1990 से 2023 के बीच भारत में स्तन कैंसर के मामलों में 477 प्रतिशत की चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है। यही नहीं, इस अवधि में इससे होने वाली मौतों की संख्या में भी 352 प्रतिशत का इजाफा दर्ज हुआ है। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य पर स्तन कैंसर का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
वैश्विक परिदृश्य: 2050 तक और गंभीर होगा संकट
लैंसेट आंकोलाजी में प्रकाशित इस विस्तृत अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक दुनियाभर में स्तन कैंसर के मामले बढ़कर 35 लाख तक पहुंच सकते हैं, जो 2023 के 23 लाख मामलों से लगभग एक-तिहाई अधिक होंगे। मौतों की संख्या में भी 44 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जिसके चलते हर वर्ष लगभग 13 लाख महिलाएँ इस बीमारी का शिकार हो सकती हैं। वैश्विक स्तर पर यह बीमारी महिलाओं की मृत्यु और स्वास्थ्य हानि का प्रमुख कारण बनी हुई है, जो आने वाले दशकों में और जटिल रूप ले सकती है।
आइएचएमई रिपोर्ट के आंकड़े: लगभग पाँच गुना वृद्धि
अमेरिका स्थित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की कायले भांगडिया के नेतृत्व में तैयार अध्ययन के अनुसार, भारत में 2023 में लगभग 2.03 लाख स्तन कैंसर के मामले दर्ज किए गए। यह संख्या 1990 में दर्ज मामलों से लगभग पाँच गुना अधिक है। वर्ष 2023 में इस बीमारी से एक लाख से अधिक महिलाओं की मृत्यु हुई, जो 1990 की तुलना में 352 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। यह स्पष्ट संकेत है कि बीमारी का भार लगातार बढ़ रहा है और स्वास्थ्य प्रणाली पर इसका दबाव भी तेज़ी से बढ़ रहा है।
आय वर्ग के आधार पर असमान प्रभाव: निम्न आय वर्ग में सबसे अधिक जोखिम
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि स्तन कैंसर का प्रभाव सभी आय वर्गों पर समान नहीं है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर इस बीमारी का बोझ असमान रूप से अधिक बढ़ा है। अध्ययन में पाया गया कि निम्न आय वाले समूहों में आयु-आधारित मानकीकृत घटना दर में 147 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह वृद्धि मात्र 1.2 प्रतिशत रही। इसका कारण समय पर जांच की कमी, जागरूकता का अभाव, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और देर से निदान जैसी स्थितियाँ मानी जा रही हैं।
मृत्यु दर में असमानता: बेहतर सुविधाओं वाले देशों में गिरावट, गरीब देशों में बढ़ोतरी
अध्ययन यह भी बताता है कि उच्च आय वाले देशों में आयु-आधारित मानकीकृत मृत्यु दर में 29.9 प्रतिशत की कमी आई है। इसका सीधा संबंध समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रणालियों और व्यापक कैंसर केयर से है। इसके विपरीत निम्न आय वाले समूहों में मृत्यु दर में लगभग 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका अर्थ यह है कि जहां संसाधन उपलब्ध हैं, वहाँ रोग नियंत्रण संभव है, लेकिन सीमित संसाधनों वाले देशों में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
भारत के लिए चेतावनी और समाधान की आवश्यकता
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत और उसके जैसे देशों में स्तन कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर स्क्रीनिंग, जागरूकता अभियान, प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना और महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। यदि समय रहते व्यापक रणनीति नहीं अपनाई गई तो आने वाले वर्षों में स्तन कैंसर भारत की स्वास्थ्य प्रणाली के सामने अत्यंत गंभीर चुनौती बन सकता है।
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