आंध्रप्रदेश/भुवनेश्वर: चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने सोमवार देर रात करीब 1 बजे आंध्रप्रदेश के तट पर दस्तक दी। मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान ने नेल्लोर और नरसपुर के बीच तट को पार किया। इस दौरान तटीय इलाकों में 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। तूफान के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कई राज्यों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।
आंध्रप्रदेश और चेन्नई में 30 उड़ानें रद्द
चक्रवाती तूफान के असर से हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ है। आंध्रप्रदेश के तीन एयरपोर्ट से 19 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, चेन्नई एयरपोर्ट से भी 11 फ्लाइट्स कैंसिल की गई हैं। इस तरह कुल 30 उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। यात्रियों को एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी गई है।
ओडिशा में 1.6 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
चक्रवात के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया है। गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों से करीब 1.6 लाख लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
पांच राज्यों में NDRF की 37 टीमें तैनात
चक्रवात से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल यानी NDRF की 37 टीमें पांच राज्यों में तैनात की गई हैं। इनमें से 13 टीमें आंध्र प्रदेश में लगाई गई हैं। इन टीमों को राहत और बचाव कार्यों के लिए तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
कई राज्यों में दिख सकता है तूफान का असर
मुरासु चक्रवात का असर केवल आंध्रप्रदेश और ओडिशा तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।मौसम की स्थिति को देखते हुए संबंधित राज्यों में सतर्कता बरतने की जरूरत है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
राहत और बचाव कार्यों पर प्रशासन की नजर
चक्रवाती तूफान को देखते हुए प्रभावित राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। NDRF की टीमें तैनात हैं और संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। तूफान के कारण हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है। आने वाले समय में मौसम की स्थिति के अनुसार राहत और बचाव अभियान जारी रहने की उम्मीद है।