भोपाल/नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात 'अर्नब' के बाद अब एक और मौसमी संकट मंडरा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, समुद्र में बना गहरे दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान 'मुरासु' में बदल रहा है। इसके आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की ओर बढ़ने और मंगलवार तक तट से टकराने की आशंका जताई गई है। तूफान के दौरान हवा की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जबकि झोंकों की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में भारी बारिश का खतरा है।
क्या है मुरासु साइक्लोन और कहां से आया इसका नाम?
चक्रवात 'मुरासु' का नाम भारत की ओर से सुझाया गया है। यह तमिल भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ढोल या पारंपरिक ताल वाद्य यंत्र होता है।प्राचीन समय में मुरासु ढोल का इस्तेमाल राजकीय घोषणाएं करने और आम लोगों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था। संकट या आपदा के समय लोगों को सतर्क करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता था।इसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इस चक्रवात का नाम मुरासु रखा गया है।
कितना खतरनाक है मुरासु तूफान?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, मुरासु के प्रभाव से तटीय इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं हवा के झोंकों की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।इससे पेड़ गिरने, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश का खतरा
मुरासु तूफान का सबसे ज्यादा असर दक्षिण और पूर्वी भारत के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं
आंध्र प्रदेश: तटीय जिलों और रायलसीमा में भारी बारिश की आशंका।
ओडिशा: कई इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश का खतरा।
तेलंगाना: कुछ हिस्सों में भारी बारिश और जलभराव की संभावना।
तमिलनाडु: तटीय क्षेत्रों में तेज बारिश और हवाओं का असर।
पुडुचेरी और कराईकल: भारी बारिश की संभावना।
केरल और माहे: कुछ इलाकों में तेज बारिश का अनुमान।
कुछ क्षेत्रों में 200 से 300 मिलीमीटर तक बारिश होने की आशंका जताई गई है। इतनी अधिक बारिश से निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बन सकती है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा
आंध्र प्रदेश में कृष्णा, गुंटूर, बापटला, प्रकाशम और नेल्लोर जिलों को ज्यादा संवेदनशील बताया गया है।तूफान के तट से टकराने के दौरान इन इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश का असर देखने को मिल सकता है। इसके बाद मौसम प्रणाली का प्रभाव तेलंगाना और दक्षिणी ओडिशा तक पहुंचने की संभावना है।समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने की आशंका को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है।
मध्यप्रदेश समेत उत्तर भारत के मौसम पर भी असर
चक्रवात मुरासु का प्रभाव केवल दक्षिण भारत तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। इसके चलते मध्यप्रदेश सहित देश के दूसरे हिस्सों में भी मौसम बदल सकता है।मध्यप्रदेश में 5 नवंबर तक कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम और इंदौर संभाग के जिलों में मौसम प्रभावित हो सकता है।वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में भी मौसम में बदलाव और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना जताई गई है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह
चक्रवात के खतरे को देखते हुए तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और तेज हवाएं चलने के कारण मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में मौसम की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा इंतजाम करने की तैयारी की जा रही है।