कोलकाता: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से 25 जुलाई 2026 को इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन उनका राजनीतिक सफर केवल इस इस्तीफे तक सीमित नहीं है। वर्ष 1983 में एक छात्र कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुई उनकी यात्रा ने उन्हें ABVP के राष्ट्रीय नेता, भाजपा के प्रमुख चेहरों, सांसद और केंद्र सरकार के कई अहम मंत्रालयों का जिम्मा संभालने वाले केंद्रीय मंत्री तक पहुंचाया। आइए जानते हैं छात्र राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक धर्मेंद्र प्रधान के चार दशक लंबे राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव।
1983: छात्र राजनीति से की शुरुआत
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में तालचेर कॉलेज से की। छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए वे बाद में तालचेर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष भी बने और यहीं से उनके नेतृत्व कौशल को पहचान मिली।

1990 का दशक: ABVP में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे
1990 के दशक में धर्मेंद्र प्रधान ने ABVP में लगातार जिम्मेदारियां संभालीं और संगठन के राष्ट्रीय सचिव बने। वर्ष 1997 में उन्होंने ओडिशा में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे उनकी पहचान एक सक्रिय छात्र नेता के रूप में मजबूत हुई।

1998-2004: भाजपा में एंट्री और विधायक के रूप में पहचान
इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 2000 के दशक में वे ओडिशा की पल्लहाड़ा विधानसभा सीट से विधायक बने। विधानसभा में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें ओडिशा का प्रतिष्ठित 'उत्कलमणि गोपबंधु प्रतिभा सम्मान' (सर्वश्रेष्ठ विधायक) भी मिला।
2004-2006: सांसद और BJYM के राष्ट्रीय अध्यक्ष
वर्ष 2004 में धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा की देवगढ़ लोकसभा सीट से 14वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए। इसी दौरान उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाया गया। इस दौर में उन्होंने युवा राजनीति और संगठन विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में बढ़ता कद
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री बनाया गया। 2017 में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया और उन्होंने इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2021 में उन्हें शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
25 जुलाई 2026: शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा
25 जुलाई 2026 को देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बढ़ते विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में प्रदर्शन तेज हुए थे, जिसके बाद उनका इस्तीफा राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा घटनाक्रम बन गया।

छात्र नेता से केंद्रीय मंत्री तक का सफर
करीब चार दशकों के राजनीतिक जीवन में धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र नेता, संगठन के पदाधिकारी, विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री जैसी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उनका इस्तीफा भले ही एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत माना जा रहा हो, लेकिन छात्र राजनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक का उनका सफर भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण यात्रा के रूप में देखा जाता है।