आज पूरे देश में इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार ईद-उल-फितर धूमधाम से मनाया जा रहा है। रमजान के पूरे महीने रोज़े रखने के बाद जब नया चाँद दिखाई देता है, तभी शव्वाल महीने की शुरुआत होती है और उसी के पहले दिन ईद मनाई जाती है। इस दिन सुबह लोग ईद की नमाज़ अदा करते हैं और रोज़ों का सिलसिला समाप्त होता है। यह पर्व खुशियों को साझा करने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने का संदेश देता है।
ईद-उल-फितर का महत्व
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी दौरान पहली बार क़ुरान शरीफ़ का अवतरण हुआ था। कहा जाता है कि पैगंबर हजरत मुहम्मद मक्का से मदीना आने के बाद ईद-उल-फितर मनाने की परंपरा शुरू हुई थी। तब से यह दिन खुशियों और भाईचारे के त्योहार के रूप में मनाया जा रहा है।
ईद के अवसर पर घरों में तरह-तरह के मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं, विशेष रूप से सेवइयां। मेहमानों का स्वागत मिठाइयों से किया जाता है और बच्चों एवं अपनों को ईदी दी जाती है। लोग एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई देते हैं। साथ ही, इस दिन दान और जरूरतमंदों की मदद करने का विशेष महत्व होता है।
ईद-उल-फितर कैसे मनाई जाती है?
ईद के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे और नए कपड़े पहनते हैं और मस्जिद या ईदगाह में जाकर नमाज़ अदा करते हैं। इसके बाद परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ मिलकर खुशियां साझा की जाती हैं। घरों में सेवइयां, शीर खुरमा और अन्य स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे को मिठाई और तोहफे देकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। यह त्योहार प्यार, भाईचारे और खुशी का संदेश फैलाता है।
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