Bhopal Gas Tragedy: सुप्रीम कोर्ट 1984 की भोपाल गैस आपदा के पीड़ितों के लिए मुआवजे में वृद्धि के लिए केंद्र की क्यूरेटिव याचिका पर आज फैसला सुना चुकी है। इस मामले का फैसला जस्टिस संजय किशन कौल की अगुवाई वाले पांच जजों के संविधान पैनल द्वारा किया गया है। 12 जनवरी को जस्टिस संजीव खन्ना, अभय एस ओका, विक्रम नाथ और जेके महेश्वर के पैनल ने केंद्र की क्यूरेटिव अपील पर अपना फैसला टाल दिया था।
SC ने खारिज की याचिका (Bhopal Gas Tragedy)
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने 1984 भोपाल गैस त्रासदी में पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजा काफी था। अगर सरकार को ज्यादा मुआवजा जरूरी लगता है तो खुद देना चाहिए था।
Supreme Court rejects Centre's curative plea for enhanced compensation for the victims of the 1984 Bhopal Gas tragedy from US-based firm Union Carbide Corporation, now owned by Dow Chemicals. pic.twitter.com/bYaCN0VIBg
— ANI (@ANI) March 14, 2023
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
SC ने कहा की, "हम दो दशकों के बाद इस मुद्दे को उठाने के लिए कोई तर्क प्रस्तुत नहीं करने के लिए भारत सरकार से असंतुष्ट हैं (Bhopal Gas Tragedy), हमारा मानना है कि सुधारात्मक याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता है।" इससे पहले जस्टिस संजीव खन्ना, अभय एस ओका, विक्रम नाथ और जे के महेश्वर की बेंच ने भी 12 जनवरी को केंद्र की उपचारात्मक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्यूरेटिव याचिका पर केंद्र से पूछा उसका स्टैंड
यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो 1989 में हुए समझौते के अलावा भोपाल गैस पीड़ितों (Bhopal Gas Tragedy) को एक भी पैसा नहीं देगा। 20 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार से पूछा था कि पीड़ितों को मुआवजा बढ़ाने को लेकर दाखिल क्यूरेटिव याचिका पर उसका स्टैंड क्या है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट 2010 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा दाखिल याचिका पर भी केंद्र के रुख के बारे में पूछा था।
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