अभी तक उड़ान विलंब का मुख्य कारण खराब मौसम, दृश्यता, एयर ट्रैफिक और तकनीकी समस्याएं हुआ करती थीं, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार अगले कुछ वर्षों में दुनिया एक नए संकट का सामना करेगी। अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ता स्पेस डेब्रिस यानी उपग्रहों के अवशेष, टूटे रॉकेट हिस्से और निष्क्रिय उपकरण धीरे-धीरे पृथ्वी के लिए नया खतरा बनते जा रहे हैं। कई देशों के वैज्ञानिक चेतावनी दे चुके हैं कि आसमान में बढ़ता यह अव्यवस्थित मलबा हवाई उड़ानों के मार्ग को बाधित कर सकता है।
अनियंत्रित रॉकेट री-एंट्री से बंद हो सकता है हवाई क्षेत्र
रिपोर्टों के अनुसार कई ऐसे रॉकेट और उपग्रह हैं जिनकी पृथ्वी पर वापसी पर कोई नियंत्रण नहीं होता। जब ये विशाल धातु के टुकड़े पृथ्वी की ओर गिरते हैं तो सुरक्षा कारणों से बड़े क्षेत्रों का हवाई मार्ग अस्थायी रूप से बंद करना पड़ता है। यह प्रक्रिया किसी भी देश में उड़ानों के संचालन को घंटों तक रोक सकती है और इससे एयरलाइंस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह स्थिति और गंभीर हुई तो आने वाले वर्षों में ‘आसमान में चक्का जाम’ जैसी स्थिति बन सकती है।
2030 तक उपग्रहों की संख्या में भारी वृद्धि का अनुमान
स्पेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक फिलहाल पृथ्वी की कक्षा में लगभग दस हजार से अधिक सक्रिय और निष्क्रिय उपग्रह मौजूद हैं, लेकिन 2030 तक इस संख्या में कई गुना वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। दुनियाभर की बड़ी कंपनियां और देश लगातार नए उपग्रह लॉन्च कर रहे हैं, जिससे भीड़ तेजी से बढ़ रही है। कक्षा में बढ़ती यह भीड़ और उसमें फैला मलबा एक-दूसरे से टकरा कर और अधिक अवशेष पैदा करता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
हवाई यातायात पर बढ़ेगा दबाव और यात्रियों को झेलनी पड़ सकती है परेशानी
एयरलाइंस पहले से ही बढ़ते ट्रैफिक और सीमित हवाई गलियारों के कारण चुनौतियों का सामना कर रही हैं। यदि स्पेस डेब्रिस के चलते अधिक क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, तो इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ेगा। उड़ानों की देरी, रद्दीकरण और समय-सारिणी में भारी अव्यवस्था अगले दशक में सामान्य बात बन सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस नीति नहीं बनी, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
समाधान की राह और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत
इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने स्पष्ट उपाय सुझाए हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे नियम बनाए जाएं जो निष्क्रिय उपग्रहों को सुरक्षित रूप से कक्षा से हटाने को अनिवार्य करें। साथ ही नए रॉकेट लॉन्च के दौरान उनकी वापसी की सुरक्षित योजना भी तैयार की जाए। कई देश इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक सहयोग अनिवार्य हो गया है। वैज्ञानिकों का दावा है कि अभी कदम उठाए जाएं, तभी भविष्य में उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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