मुंबई. आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की खुदकुशी के बाद मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मृतक छात्र के माता-पिता प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस घटना ने परिसर में तनाव बढ़ा दिया। प्रोफेसरों और छात्रों ने पुलिस की मौजूदगी और कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रशासन को इस पूरे प्रकरण पर सफाई देनी पड़ी। कैंपस में सुरक्षा बलों की सक्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। पूरे मामले ने संस्थान की छवि को प्रभावित किया है।
प्रोफेसरों की आपत्ति और ईमेल
आईआईटी बॉम्बे के 10 प्रोफेसरों ने निदेशक को ईमेल लिखकर पूछा कि आखिर कैंपस में पुलिस ने इस तरह दखल क्यों दिया। प्रोफेसरों का कहना है कि प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन परिस्थितियों में छात्रों को हिरासत में लिया गया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को अनावश्यक बताया। ईमेल में परिसर की स्वायत्तता और छात्रों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया। प्रोफेसरों की इस आपत्ति ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया। कई शिक्षकों ने खुलेआम अपनी नाराजगी जताई। पूरे प्रकरण ने अकादमिक समुदाय में चर्चा पैदा कर दी है।
प्रशासन की सफाई और कारण
आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि सांसद वर्षा गायकवाड़ और विधायक असलम शेख के दौरे की वजह से कैंपस में पुलिस मौजूद थी। मृतक छात्र के माता-पिता भी उसी समय प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन के अनुसार कुछ छात्रों ने पुलिस पर आक्रामक रवैया अपनाया और उनकी ड्यूटी में बाधा डालने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने छात्रों को हिरासत में ले लिया। प्रशासन ने दावा किया कि माता-पिता को कैंपस आने की इजाजत दी गई थी। इस सफाई से विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
छात्रों की हिरासत और रिहाई
पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में लिया था जिन्हें शाम को रिहा कर दिया गया। प्रशासन ने कहा कि छात्रों का जो भी निजी सामान जमा करवाया गया है उसे वापस कर दिया जाएगा। प्रोफेसरों का आरोप है कि हिरासत की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। छात्रों के बीच इस घटना से नाराजगी फैल गई। कई छात्र सुरक्षा बलों की मौजूदगी को कैंपस संस्कृति के खिलाफ मान रहे हैं। प्रशासन अब छात्रों से बातचीत करके तनाव कम करने की कोशिश में है। पूरे प्रकरण ने परिसर में अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रोफेसर दुल्ला को अवकाश पर भेजा गया
विरोध प्रदर्शनों के बाद आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को छात्र कल्याण डीन के पद से हटा दिया और उन्हें अवकाश पर भेज दिया। संस्थान के बोर्ड ने छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की है। मृतक छात्र के परिजन लगातार प्रोफेसर की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। इससे पहले माता-पिता आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर भी बैठ चुके हैं। वे निदेशक शिरीष केदारे की भी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। मामला अब जांच के अधीन है।
जांच समिति और आगे की कार्रवाई
अपराध शाखा अब तक माता-पिता छात्रों और छात्रावास कर्मचारियों सहित करीब 40 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। मामले की जांच जारी है। 10 सदस्यीय समिति छात्र की मौत की परिस्थितियों की गहराई से जांच करेगी। प्रशासन छात्रों के सामान वापस करने और तनाव कम करने के प्रयास में लगा है। प्रोफेसरों और छात्रों की आपत्तियों को देखते हुए संस्थान को और पारदर्शिता बरतनी होगी। पूरा मामला अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।