केंद्रीय ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार करते हुए भारत में लगभग 6,600 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण किया जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन संयंत्रों के शुरू होने के बाद देश की ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
भविष्य के लिए तैयार हो रही नई परमाणु परियोजनाए
सरकार के अनुसार 7,000 मेगावाट क्षमता के अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी योजना और अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से भारत दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है। वर्तमान में देश की कुल परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 8,780 मेगावाट से अधिक है, जिसे आने वाले वर्षों में काफी बढ़ाने की योजना है।
जलविद्युत परियोजनाओं से भी बढ़ेगी बिजली क्षमता
परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ जलविद्युत क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर काम जारी है। लगभग 12,723.50 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त 4,274 मेगावाट क्षमता की कई अन्य परियोजनाएं योजना के विभिन्न चरणों में हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं को वर्ष 2031-32 तक पूरा किया जाए, जिससे देश की बिजली आपूर्ति और अधिक स्थिर हो सके।
ऊर्जा भंडारण पर भी दिया जा रहा है जोर
ऊर्जा प्रणाली को स्थिर बनाने के लिए पंप स्टोरेज परियोजनाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। लगभग 11,620 मेगावाट क्षमता की पंप स्टोरेज परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 6,580 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा लगभग 9,653.94 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली का निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे भविष्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही
केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने संसद को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी 2026 तक देश में 52,536.49 मेगावाट की नई स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी गई है। 31 जनवरी तक भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 5,20,511 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। इनमें से 2,63,189 मेगावाट यानी लगभग 50.6 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों के अनुसार परमाणु ऊर्जा, जलविद्युत और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का यह संयुक्त विस्तार भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मामले में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा बल्कि स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा की दिशा में भी देश को बड़ी मजबूती मिलेगी।
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