पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। ऐसे समय पर रूस की ओर से भारत को मिला आश्वासन रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मॉस्को ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि तेल और गैस की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो वह भारत की पेट्रोल-डीजल और अन्य ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में यह भरोसा भारत की ऊर्जा रणनीति को स्थिरता प्रदान करने वाला कदम साबित हो सकता है।
कतर की उत्पादन रोक से बढ़ी अनिश्चितता
यह आश्वासन उस समय और अहम हो जाता है जब कतर एनर्जी ने दो मार्च को रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी में बुनियादी ढांचे पर ईरानी ड्रोन हमलों के बाद तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी उत्पादन को रोक दिया है। कतर वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है और उसके उत्पादन बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में खलबली मचनी स्वाभाविक है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष चिंता का विषय रही है।
रूस का भरोसा: ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने पर भी भारत को परेशानी नहीं
मॉस्को स्थित रूसी दूतावास के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यदि मौजूदा तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो रूस भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग करेगा। यह पहला अवसर नहीं है जब रूस ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति मजबूत की है। पिछले वर्षों में भी भारत ने रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से उत्पन्न नई चुनौती
ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किए जाने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया की बड़ी ऊर्जा सप्लाई इसी मार्ग से होकर गुजरती है। भारत कच्चे तेल और एलएनजी का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है, इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि रूस से बढ़ी हुई आपूर्ति ने भारत की इस चिंता को काफी हद तक कम किया है।
भारत की ऊर्जा कूटनीति को मिली मजबूती
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाकर अपनी ऊर्जा कूटनीति को काफी मजबूत किया है। रूस से आयात बढ़ना, खाड़ी देशों के साथ वैकल्पिक समझौते और घरेलू ऊर्जा उत्पादन पर फोकस—इन सबने मिलकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाया है। मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में रूस का आश्वासन भारत की इस रणनीति को और अधिक विश्वसनीय बनाता है और संकेत देता है कि भारत के पास संकट से निपटने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं।
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