देश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। तेज़ी से आगे बढ़ते दक्षिण-पश्चिम मानसून और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बारिश, आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति कम से कम 18 जून तक बनी रह सकती है। इस दौरान कई जगहों पर 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
कई राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान का असर
पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर से लेकर तटीय कर्नाटक तक विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश और आंधी-तूफान दर्ज किया गया है। बिहार और पंजाब में बिजली गिरने की घटनाओं में कई लोगों की मौत भी हुई है। उत्तरप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं देखने को मिलीं। वहीं कई अन्य राज्यों में भी मौसम का यही रुख बना हुआ है।
उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक बदला मौसम
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में व्यापक बारिश दर्ज की गई है। हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई, जबकि केरल और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रहा। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में भी तेज हवाओं के साथ वर्षा हुई। कुछ क्षेत्रों में गर्म हवाओं और लू जैसी स्थिति भी देखने को मिली।
18 जून तक मौसम में रहेगा उतार-चढ़ाव
मौसम विभाग ने बताया है कि उत्तर-पश्चिम भारत के जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की भी संभावना है।इसके अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वोत्तर भारत में भी अगले कुछ दिनों तक तेज हवाओं और भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की चेतावनी दी गई है।
मानसून की प्रगति और पूर्वी यूपी में एंट्री के संकेत
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूर्वी उत्तरप्रदेश की सीमा के करीब पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। अगले 2 से 3 दिनों में इसके मध्य भारत और अन्य राज्यों में पहुंचने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
अल नीनो का बढ़ता प्रभाव
मौसम विभाग ने बताया है कि इस समय भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति सक्रिय है, जिसका असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो की स्थिति भारत में सामान्य से कम बारिश या सूखे जैसी परिस्थितियों का कारण बन सकती है। आने वाले समय में इसके प्रभाव और अधिक बढ़ने की संभावना जताई गई है।