ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बना दिया है। इस मार्ग से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हाल के महीनों में हुए हमलों ने समुद्री परिवहन उद्योग की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं का सबसे अधिक असर उन भारतीय नाविकों पर पड़ा है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फरवरी से अब तक विभिन्न घटनाओं में 15 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
तेल टैंकरों पर हमले में बढ़ा मानवीय संकट
हाल ही में दो विशाल तेल टैंकरों ‘मोम्बासा बी’ और ‘अल बह्या’ पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ा दी। संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों पोत ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। इस घटना में एक भारतीय नाविक की मृत्यु हो गई, जबकि छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक घायल हुए। बताया गया कि घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। जहाजों को भी भारी क्षति पहुंची है, जिससे समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
भारत ने कूटनीतिक स्तर पर जताई चिंता
भारतीय नागरिकों की मृत्यु और घायल होने की घटनाओं के बाद भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित ईरानी राजनयिकों को विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस दौरान भारत ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और समुद्री मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीतिक नीति अपनाता रहा है और वर्तमान परिस्थिति में भी उसने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
लगातार बढ़ रही हैं समुद्री हादसों की घटनाए
हालिया हमला कोई अकेली घटना नहीं है। इसी अवधि में पलाऊ के ध्वज वाले एक अन्य तेल टैंकर पर हुए हमले में भी दो भारतीय नाविकों की जान चली गई थी। इसके अतिरिक्त होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट भारतीय चालक दल को लेकर जा रही एक पारंपरिक समुद्री नाव में आग लगने से भी एक भारतीय की मृत्यु हुई। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर उन नागरिकों पर पड़ रहा है, जिनका संघर्ष से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, बल्कि वे केवल अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी मात्रा विभिन्न देशों तक पहुंचती है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों व्यापारिक जहाज गुजरते हैं और उन पर हजारों भारतीय नाविक कार्यरत रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो न केवल ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, बल्कि वैश्विक व्यापार, बीमा लागत, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, बेहतर निगरानी व्यवस्था और संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। भारत विश्व के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है और हजारों भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर सेवाएं देते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव केवल कूटनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार की स्थिरता से जुड़ा गंभीर मानवीय विषय भी बन चुका है।