अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले (एयरस्ट्राइक) किए। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान पर दबाव बढ़ाना और उसे बातचीत की मेज पर लाना है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान ने जल्द समझौते की दिशा में कदम नहीं बढ़ाया, तो आने वाले दिनों में उसके बिजलीघर, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को भी निशाना बनाया जाएगा।
ट्रम्प बोले- समझौता नहीं किया तो कुछ नहीं बचेगा
एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि मंगलवार रात के हमलों के बाद भी अभियान जारी रहेगा और अगले सप्ताह रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए जा सकते हैं।
ट्रम्प ने कहा, "अगर ईरान समझौता नहीं करता, तो वहां कुछ भी नहीं बचेगा।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका जमीनी सैन्य अभियान (Ground Operation) भी शुरू कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में सहयोगी देशों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी शुरू
अमेरिका ने ईरान के कई बंदरगाहों के आसपास समुद्री गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ईरान की सैन्य और आर्थिक गतिविधियों को सीमित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई के कारण पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े घटनाक्रम
. होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमला
होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला होने की खबर सामने आई है। इस घटना में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। इस घटना के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
भारत ने ईरानी राजनयिक को किया तलब
जहाजों पर हुए हमले के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (Deputy Chief of Mission) को तलब कर घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
. फारस की खाड़ी में फंसे 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। सुरक्षा कारणों से ये जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
ट्रम्प ने वापस लिया 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला
डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर प्रस्तावित 20 प्रतिशत टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया है। बताया गया कि मध्य-पूर्व के कई देशों के नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया, ताकि क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित न हों।
होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट
लगातार बढ़ते तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट से केवल चार जहाज ही गुजर सके, जो हाल के दिनों में सबसे कम संख्या मानी जा रही है। समुद्री मार्ग पर बढ़ते खतरे के कारण कई शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों की आवाजाही पर पुनर्विचार कर रही हैं।
वैश्विक तेल बाजार पर भी बढ़ा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
दुनिया की नजर मध्य-पूर्व के हालात पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव को लेकर दुनिया के कई देश लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच जारी बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।