MP Promotion Reservation Case: मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में मंगलवार (14 जुलाई) को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। एक्टिंग चीफ जस्टिस द्वारा गठित स्पेशल डिवीजन बेंच के सामने राज्य सरकार ने अपना जवाब पेश किया। सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण का निर्णय पिछड़ेपन (Backwardness) और प्रतिनिधित्व (Representation) से जुड़े आंकड़ों के आधार पर लिया गया है। सरकार की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि जिस क्वांटिफाएबल डेटा के आधार पर सरकार प्रमोशन में आरक्षण लागू करने की बात कर रही है, उसे याचिकाकर्ताओं के साथ भी साझा किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कोई गोपनीय सरकारी दस्तावेज नहीं है और निष्पक्ष सुनवाई के लिए सभी पक्षों को समान जानकारी मिलना आवश्यक है।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण संबंधी निर्णय पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों के आधार पर लिया गया है। सरकार ने यह भी बताया कि हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों के अनुसार संबंधित डेटा सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
हाईकोर्ट ने डेटा साझा करने का क्यों दिया आदेश?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश मौजूद नहीं है, जिसमें सरकार को यह छूट दी गई हो कि वह यह डेटा याचिकाकर्ताओं से छिपाकर रखे। अदालत ने कहा कि-
यह क्वांटिफाएबल डेटा किसी प्रकार की गोपनीय सरकारी सूचना नहीं है।
यदि याचिकाकर्ताओं को पूरा रिकॉर्ड नहीं मिलेगा तो वे अपनी आपत्तियां प्रभावी तरीके से दर्ज नहीं कर पाएंगे।
निष्पक्ष सुनवाई के लिए सभी पक्षों के पास समान जानकारी होना जरूरी है।
इसी आधार पर कोर्ट ने सरकार को पूरा डेटा साझा करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने सरकार की कार्यवाही पर भी जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुराने आदेशों का रिकॉर्ड देखा। अदालत ने पाया कि 16 अक्टूबर 2025 को सरकार को स्टडी और सर्वे से जुड़ा पूरा डेटा पेश करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 28 अक्टूबर को सरकार ने केवल कुछ दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में जमा किए और बाकी दस्तावेज बाद में देने की बात कही, लेकिन वे रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किए गए। इस पर कोर्ट ने माना कि सरकार ने पहले दिए गए आदेशों का पूर्ण पालन नहीं किया।
17 जुलाई तक दर्ज होंगी आपत्तियां
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार अगले दिन तक पूरा डेटा प्रतिवादियों को उपलब्ध कराए। डेटा मिलने के बाद याचिकाकर्ता 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां दाखिल कर सकेंगे।
21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे निर्धारित की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस मामले की नियमित सुनवाई करना चाहती है। हालांकि, अन्य मामलों में व्यस्तता और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपलब्धता को देखते हुए अगली तारीख तय की गई है।
प्रमोशन में आरक्षण विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है। इस मामले का सीधा प्रभाव-
हजारों सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन,
आरक्षण नीति,
प्रशासनिक नियुक्तियों,
और भविष्य की पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसी कारण यह मामला राज्य के सबसे महत्वपूर्ण सेवा संबंधी मामलों में गिना जाता है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए सरकार को संबंधित डेटा याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करने का निर्देश दिया है। अब सभी पक्षों की आपत्तियों और दलीलों के बाद 21 जुलाई की सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।