कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘वैनिश कमीशन’ बताया और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी सही मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए इसका गलत इस्तेमाल कर रही है। मुख्यमंत्री ने 6 मार्च को दोपहर 2 बजे से कोलकाता केएस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर धरना शुरू किया था, जो तीसरे दिन भी जारी है। यह प्रदर्शन राज्य में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में किया जा रहा है।
‘लोकतांत्रिक संस्थाओं का हो रहा दुरुपयोग’
धरना स्थल से संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि ‘एक देश, एक नेता और एक पार्टी’ के पागलपन में बीजेपी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों का व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक मंशा पूरी करने के लिए विभिन्न एजेंसियों और संस्थाओं का इस्तेमाल कर रही है।
संविधान बदलने का भी लगाया आरोप
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि बीजेपी का अंतिम लक्ष्य बी.आर. अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को बदलकर उसकी जगह पार्टी के घोषणापत्र को लागू करना है। उन्होंने कहा कि यह देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
धरना से BJP पर कई आरोप
धरने के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि वर्षों से केंद्रीय एजेंसियों, राष्ट्रीय आयोगों और मीडिया के एक हिस्से का इस्तेमाल बंगाल के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व दिल्ली का ‘जमींदार’ बनकर बंगाल पर नियंत्रण करना चाहता है, लेकिन राज्य की जनता ऐसा होने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि धर्मतला में चल रहा यह धरना बंगाल-विरोधी एजेंडे के खिलाफ जनता की आवाज है।
वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 28 फरवरी तक करीब 63.66 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा 60 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में कानूनी जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि वे वोट देने के योग्य हैं या नहीं।
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