भोपाल- केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन को भारतीय जनता पार्टी ने तमिलनाडु की अविनाशी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है। फिलहाल वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री हैं। ऐसे में उनकी संभावित जीत सिर्फ तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर मध्यप्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा। अगर मुरुगन विधानसभा चुनाव जीतते हैं, तो उन्हें संसद और विधानसभा-दोनों में से एक पद छोड़ना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ दोनों सदनों का सदस्य नहीं रह सकता।
संविधान क्या कहता है: 14 दिन में लेना होगा फैसला
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101(2) के तहत, यदि कोई सांसद विधानसभा चुनाव जीतता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य होता है। मुरुगन के मामले में माना जा रहा है कि यदि वे चुनाव जीतते हैं, तो वे राज्यसभा सीट छोड़ सकते हैं, क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका बढ़ेगी।
खाली होगी राज्यसभा सीट, उपचुनाव तय
मुरुगन के इस्तीफे की स्थिति में मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट खाली हो जाएगी। चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर इस सीट पर उपचुनाव कराना होगा। यह उपचुनाव प्रदेश की सियासत में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि सत्तारूढ़ भाजपा के पास विधानसभा में मजबूत बहुमत है, जिससे उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है।
बीजेपी के लिए मौका, कांग्रेस के लिए चुनौती
मध्यप्रदेश में भाजपा के पास 160 से अधिक विधायक हैं, जिससे उपचुनाव में उसकी स्थिति मजबूत दिखती है। वहीं कांग्रेस के लिए यह सीट बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और आंतरिक खींचतान के बीच। इस संभावित खाली सीट को लेकर पार्टी के भीतर नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चा भी तेज हो गई है।
सियासी हलचल क्यों तेज?
यह पूरा मामला सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बन गया है। मुरुगन की जीत से:
राज्यसभा की सीट खाली होगी
उपचुनाव होगा
नए चेहरे को मौका मिलेगा
दोनों दलों के बीच रणनीतिक मुकाबला बढ़ेगा
यानी तमिलनाडु का चुनाव परिणाम मध्यप्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।