नई दिल्ली - केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा, "देर आए, दुरुस्त आए। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कथित NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है।
प्रधानमंत्री से जल्द फैसला लेने की अपील
भारतीय जनता पार्टी के सबसे सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि, "श्री धर्मेंद्र प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है। आशा करता हूं कि प्रधानमंत्री जी भी इस पर शीघ्र ही समयोचित निर्णय लेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि अब प्रधानमंत्री स्तर पर इस इस्तीफे को लेकर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सके।
छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन की सराहना
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आंदोलन में शामिल छात्रों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि वे उन सभी छात्रों को बधाई देते हैं, जिन्होंने अपना विरोध शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त किया। भारतीय जनता पार्टी के सबसे सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी ने उम्मीद जताई कि अब देश के शिक्षा जगत में सामान्य स्थिति बहाल होगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा।
'शिक्षा जगत में जल्द लौटे शांति'
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि उनकी कामना है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में जल्द शांति स्थापित हो और छात्रों को अपने उज्ज्वल भविष्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रगति के लिए व्यापक अवसर प्राप्त हों। पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने और छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
NEET विवाद के बीच आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कथित NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ियों और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच आया है। छात्र संगठनों और विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी। इसी बीच उनके पद छोड़ने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की टिप्पणी को भी इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों क्षेत्रों में इस फैसले को लेकर चर्चा जारी है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम और नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिकी हैं। वहीं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
