22 मार्च यानी आज नवरात्र का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा की जाती है।माता कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। वे अपने हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, चक्र, गदा, कमल-पुष्प, अमृत कलश और जप माला धारण करती हैं। मान्यता है कि माता कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ही सृष्टि की रचना की थी। उस समय चारों ओर अंधकार था, जिसे देवी ने अपने तेज से प्रकाशमय किया। मां कूष्मांडा में सूर्य के समान तेज माना जाता है और उनकी पूजा करने से शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
आइए जानते हैं उनकी पूजा विधि
नवरात्र के चौथे दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान पर बैठकर माता कूष्मांडा का ध्यान करें। उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं।
माता को पीले फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद उन्हें मालपुए का भोग लगाएं। यदि मालपुए उपलब्ध न हों तो पीले रंग की मिठाई या हलवा-पूरी का भोग भी लगाया जा सकता है। अंत में माता की आरती करें।
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