नई दिल्ली - केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने दोनों धातुओं के इम्पोर्ट बेस प्राइस (आधार मूल्य) में कटौती की है, जिससे आयात लागत और बाजार पर असर पड़ सकता है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
सोना और चांदी के नए बेस प्राइस
नए आदेश के अनुसार सोने का इम्पोर्ट बेस प्राइस 80 डॉलर प्रति 10 ग्राम घटाकर 1,343 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दिया गया है। वहीं चांदी के इम्पोर्ट बेस प्राइस में भी कटौती की गई है। इसे 276 डॉलर प्रति किलोग्राम घटाकर 2,092 डॉलर प्रति किलोग्राम तय किया गया है।
क्या होता है इम्पोर्ट बेस प्राइस?
इम्पोर्ट बेस प्राइस वह मानक मूल्य होता है जिस पर सरकार आयातित सोने और चांदी पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) तय करती है। इसी आधार पर टैक्स की गणना होती है। जब कोई कारोबारी विदेश से सोना या चांदी भारत लाता है, तो उस पर लगने वाला टैक्स इसी बेस प्राइस के आधार पर तय किया जाता है।
काले बाजार पर नियंत्रण का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि अगर बेस प्राइस तय न किया जाए तो सोने-चांदी की कीमतों में मनमानी और काले बाजार की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए हर समय अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार इन कीमतों को अपडेट किया जाता है, ताकि टैक्स व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बेस प्राइस में कटौती का असर इम्पोर्ट लागत और घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में ही साफ होगा। सरकार का यह कदम आयात व्यवस्था को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाने की दिशा में माना जा रहा है, जिससे व्यापारियों और बाजार दोनों पर असर देखने को मिल सकता है।