इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 35 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पूरे प्रदेश में जल स्रोतों की निगरानी और संरक्षण के लिए नई कार्ययोजना लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत सभी 55 जिलों के डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान में संशोधन किया गया है। मध्य प्रदेश में जल स्रोतों की गुणवत्ता सुधारने और जलजनित बीमारियों पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। इंदौर के भागीरथपुरा में दिसंबर-जनवरी के दौरान दूषित पानी से 35 लोगों की मौत के बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने राज्य के सभी 55 जिलों के डिस्ट्रिक्ट एनवायरनमेंट प्लान (DEP) में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत जल स्रोतों की नियमित निगरानी, हेल्थ रिपोर्ट कार्ड और जियो टैगिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
इंदौर में बनेगा वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल
नई कार्ययोजना के तहत इंदौर जिले में वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाएगा। यह सेल जिले की नदियों, नालों, तालाबों, कुओं और अन्य जल स्रोतों की नियमित जांच करेगा। जल स्रोतों की गुणवत्ता का आकलन कर उनका हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा और सभी स्रोतों की जियो टैगिंग भी की जाएगी, जिससे उनकी निगरानी और संरक्षण आसान हो सके।
9 बिंदुओं पर चलेगा जल संरक्षण अभियान
राज्य सरकार ने जल स्रोतों के संरक्षण और प्रदूषण रोकने के लिए नौ प्रमुख बिंदुओं पर आधारित कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत सतही जल, भूजल, कुएं, बावड़ियां और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ दूषित पानी के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह योजना अगले 12 से 24 महीनों के भीतर प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
भागीरथपुरा जांच रिपोर्ट बनी आधार
संशोधित पर्यावरण योजना में भागीरथपुरा हादसे की विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट में इस घटना को जल-जनित बीमारी (Water-borne Outbreak) बताया गया है। जांच में पानी में ई. कोलाई (E. coli) सहित कई हानिकारक दूषित तत्व पाए गए थे। इसी रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों से यह जानकारी मांगी गई है कि जल स्रोतों में सीवरेज और गंदे पानी के मिश्रण को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
जल स्रोतों की होगी वैज्ञानिक निगरानी
नई व्यवस्था के तहत जिले की सभी नदियों, तालाबों और प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। जल स्रोतों की गुणवत्ता के आधार पर हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार होंगे। यह कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE), नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर करेंगी। दूषित पानी वाले हॉट स्पॉट भी चिन्हित किए जाएंगे। इंदौर की कान्ह और सरस्वती नदी के प्रदूषित हिस्से इस सूची में प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ऑनलाइन निगरानी और शिकायत प्रणाली होगी मजबूत
जल स्रोतों की निगरानी के लिए पहले से संचालित ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही EVN Alert App के जरिए दूषित पानी से जुड़ी शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाएगा। सरकार जल स्रोतों को अतिक्रमण और कचरे से मुक्त रखने, भूजल स्रोतों की जियो टैगिंग, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वाटर रिचार्जिंग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर देगी, ताकि भविष्य में जलजनित बीमारियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।