मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने साफ निर्देश दिए हैं कि मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को संस्थान और मरीजों के लिए निर्धारित समय पूरी जिम्मेदारी से देना होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस के चलते सरकारी अस्पताल की सेवाएं, मरीजों का इलाज या मेडिकल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
OPD से आगे डॉक्टरों की जिम्मेदारी, OT और PG ट्रेनिंग पर भी फोकस
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के HOD के साथ हुई बैठक में डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई। राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की भूमिका सिर्फ OPD में मरीज देखने तक सीमित नहीं है। उन्हें ऑपरेशन थिएटर में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ नियमित वार्ड राउंड, मेडिकल छात्रों की कक्षाएं और PG विद्यार्थियों के प्रशिक्षण में भी सक्रिय रूप से शामिल होना होगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं का पूरा लाभ मरीजों और विद्यार्थियों को मिल सके।
डॉक्टरों की गैरहाजिरी से इलाज के साथ पढ़ाई पर भी असर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर केवल मरीजों के इलाज पर नहीं पड़ता, बल्कि मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों की शिक्षा और प्रशिक्षण भी प्रभावित होता है। खास तौर पर PG छात्रों के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की मौजूदगी और मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों की गैरहाजिरी को सरकार गंभीरता से ले रही है। यदि निजी प्रैक्टिस या किसी अन्य वजह से डॉक्टर अपनी सरकारी जिम्मेदारियों में लापरवाही करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
निलंबन से सेवा समाप्ति तक हो सकती है कार्रवाई
सरकार ने संकेत दिए हैं कि सरकारी ड्यूटी प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई संभव है। इसमें निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक के कदम शामिल हो सकते हैं। यानी सरकारी मेडिकल कॉलेज में नियुक्त डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखनी होगी। मरीजों की सेवाओं और संस्थान के कामकाज से किसी भी तरह का समझौता सरकार स्वीकार नहीं करेगी।
डॉक्टरों की Digital Attendance और कामकाज पर बढ़ेगी नजर
बैठक में डॉक्टरों की उपस्थिति और उनके कामकाज की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपलब्धता और ड्यूटी की स्थिति की बेहतर निगरानी हो सके। डिजिटल सिस्टम मजबूत होने से डॉक्टरों की उपस्थिति और संस्थान में उनकी सक्रियता पर नजर रखना आसान होगा।
सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने की प्रवृत्ति पर भी रोक
सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों से मरीजों को निजी अस्पताल या निजी क्लीनिक की ओर भेजे जाने की प्रवृत्ति पर भी गंभीरता दिखाई है। बैठक में इस तरह की प्रैक्टिस पर रोक लगाने पर जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञ सेवाओं का इस्तेमाल मरीजों के इलाज के लिए सरकारी व्यवस्था के भीतर ही अधिकतम हो।
सरकार का फोकस: मरीजों को बेहतर इलाज और छात्रों को बेहतर प्रशिक्षण
सरकार के इस सख्त रुख का मुख्य उद्देश्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना है। डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता से जहां मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिलने की उम्मीद है, वहीं मेडिकल छात्रों और PG विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा। निजी प्रैक्टिस को लेकर उठाए गए इन कदमों के बाद आने वाले समय में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी और कड़ी होने की संभावना है।