IND vs ZIM 2026: कुछ ही दिनों पहले तक भारतीय टी20 टीम लगातार सवालों के घेरे में थी। आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 सीरीज गंवाने के बाद इंग्लैंड ने भी भारत को इतिहास की सबसे शर्मनाक टी20 सीरीज हार थमा दी। लेकिन जिम्बाब्वे पहुंचते ही वही टीम पूरी तरह बदली हुई नजर आई और 3-0 से सीरीज जीतकर क्लीन स्वीप कर दिया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ऐसा क्या बदला? खिलाड़ी लगभग वही थे, कप्तान भी वही था, लेकिन नतीजे पूरी तरह बदल गए। इसका जवाब टीम मैनेजमेंट के एक अहम फैसले में छिपा नजर आता है।
इंग्लैंड दौरे पर कहां हुई सबसे बड़ी गलती?
टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय टीम से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन आयरलैंड दौरे पर टीम पहली बार टी20 सीरीज हार गई। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ भी लगातार प्रयोग देखने को मिले। सबसे ज्यादा आलोचना बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव को लेकर हुई। कई खिलाड़ियों को एक मैच खिलाकर बाहर कर दिया गया, जबकि कुछ बल्लेबाजों की पोजिशन बार-बार बदली गई। इससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास प्रभावित हुआ और टीम स्थिरता नहीं बना सकी।
जिम्बाब्वे दौरे पर बदली सिर्फ एक चीज... और बदल गए नतीजे
जिम्बाब्वे दौरे पर BCCI ने गौतम गंभीर को आराम दिया और वीवीएस लक्ष्मण को टीम की जिम्मेदारी सौंपी। यहीं से सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस बार-
प्लेइंग XI लगभग स्थिर रही।
बल्लेबाजी क्रम में अनावश्यक बदलाव नहीं हुए।
खिलाड़ियों को लगातार मौके मिले।
युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया गया।
इसी स्थिरता का असर पूरे प्रदर्शन में दिखाई दिया।
युवा खिलाड़ियों ने जीत लिया भरोसा
इस दौरे पर भारतीय टीम के कई युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी ने पूरी सीरीज में बेहतरीन बल्लेबाजी की और आखिरी मैच में 81 रन की विस्फोटक पारी खेली। ईशान किशन, श्रेयस अय्यर और रिंकू सिंह ने भी जरूरत पड़ने पर महत्वपूर्ण योगदान दिया। लगातार मौके मिलने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा।
गेंदबाजों ने भी किया कमाल
इंग्लैंड के खिलाफ जहां अनुभवी गेंदबाज होने के बावजूद टीम संघर्ष करती नजर आई, वहीं जिम्बाब्वे दौरे पर अपेक्षाकृत युवा गेंदबाजी आक्रमण ने शानदार प्रदर्शन किया। पूरी सीरीज में भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकाले और विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। नई गेंद से लेकर डेथ ओवर तक गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ बनाए रखी।
प्लेइंग XI में स्थिरता बनी सबसे बड़ी ताकत
कई पूर्व क्रिकेटरों का मानना रहा है कि खिलाड़ियों को लगातार बदलने से टीम का तालमेल प्रभावित होता है। जिम्बाब्वे दौरे पर यही गलती नहीं दोहराई गई। लगातार एक जैसी टीम उतरने से-
खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा।
भूमिकाएं स्पष्ट रहीं।
टीम संयोजन मजबूत हुआ।
बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में निरंतरता दिखी।
अब एशियन गेम्स में भी VVS Laxman पर नजरें
जिम्बाब्वे दौरे की सफलता के बाद अब एशियन गेम्स क्रिकेट प्रतियोगिता में भी वीवीएस लक्ष्मण भारतीय टीम के मुख्य कोच होंगे। वहीं गौतम गंभीर की वापसी वेस्टइंडीज दौरे से होने की संभावना है, जहां भारत को तीन वनडे और पांच टी20 मुकाबले खेलने हैं।
क्या यह सिर्फ कोचिंग का असर था?
केवल कोच बदलने से कोई टीम पूरी तरह नहीं बदलती, लेकिन टीम चयन, खिलाड़ियों को स्पष्ट भूमिका देना और लगातार भरोसा बनाए रखना किसी भी टीम की सफलता में बड़ी भूमिका निभाता है। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय टीम ने यही करके दिखाया।