रायपुर, 10 सितंबर 2026 | गणेशोत्सव से पहले रायपुर केंद्रीय जेल में आस्था, हुनर और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। यहां बंदियों ने भगवान गणेश की करीब 500 इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं तैयार की हैं। खास बात यह है कि प्राकृतिक मिट्टी और जैविक रंगों से बनी इन प्रतिमाओं में तुलसी समेत अलग-अलग पौधों के बीज भी डाले गए हैं। विसर्जन के बाद मिट्टी में मिले ये बीज अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं। इन प्रतिमाओं को आम लोगों के लिए जेल एम्पोरियम में बिक्री के लिए रखा गया है। जेल प्रशासन इस पहल को बंदियों के कौशल विकास, सकारात्मक सोच और पुनर्वास से भी जोड़कर देख रहा है।
1 से 2 फीट ऊंची हैं गणेश प्रतिमाएं
रायपुर केंद्रीय जेल में तैयार की गई मूर्तियां करीब एक से दो फीट ऊंची हैं। इन्हें बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय प्राकृतिक मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल रंगों का इस्तेमाल किया गया है। जेल अधीक्षक योगेश सिंह के मुताबिक करीब 10 बंदियों ने इन प्रतिमाओं को तैयार करने में हिस्सा लिया। बंदियों ने मूर्तियों को आकार देने से लेकर रंग और सजावट तक का काम किया है।
प्रतिमा के अंदर ही डाले गए पौधों के बीज
इन गणेश प्रतिमाओं की सबसे बड़ी खासियत इनके अंदर डाले गए बीज हैं। तुलसी के साथ दूसरे पौधों के बीज भी मिट्टी में शामिल किए गए हैं। ऐसे में अगर प्रतिमा का विसर्जन किसी गमले, मिट्टी वाले पात्र या निर्धारित पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जाए तो प्रतिमा घुलने के बाद इनमें मौजूद बीज अंकुरित हो सकते हैं। इस तरह गणेशोत्सव के बाद भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश आगे बढ़ता रहेगा।
‘आज गणेश, कल पौधा’ जैसा संदेश
आमतौर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस और केमिकल रंगों से बनी मूर्तियों के विसर्जन को लेकर जल प्रदूषण की चिंता रहती है। रायपुर जेल की यह पहल इसी समस्या का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प पेश करती है। प्राकृतिक मिट्टी पानी में अपेक्षाकृत आसानी से घुल जाती है, जबकि बीजों वाली प्रतिमा का विसर्जन मिट्टी में करने पर पौधे उगाने की संभावना भी रहती है। इसी वजह से इन मूर्तियों को आस्था के साथ हरियाली का संदेश देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
Jail Emporium में खरीद सकेंगे लोग
जेल में बनी इन मूर्तियों को आम लोगों के लिए Jail Emporium में बिक्री के लिए रखा गया है। इससे बंदियों के बनाए उत्पाद सीधे लोगों तक पहुंचेंगे और उनके हुनर को भी पहचान मिलेगी। हालांकि ताजा रिपोर्टों में सभी आकारों की अलग-अलग कीमतों का स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, इसलिए किसी निश्चित रेट का दावा करना अभी ठीक नहीं होगा।
बंदियों के Rehabilitation से भी जुड़ी पहल
रायपुर केंद्रीय जेल में मूर्ति निर्माण केवल त्योहार की गतिविधि नहीं है। जेल प्रशासन बंदियों को अलग-अलग कौशल और उत्पादन संबंधी कामों से जोड़ता है, ताकि वे सकारात्मक गतिविधियों में शामिल रहें और जेल से बाहर आने के बाद किसी हुनर को आजीविका के रूप में इस्तेमाल कर सकें। पिछले वर्षों में भी रायपुर जेल के बंदियों को मूर्तिकला और मिट्टी के उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। जेल प्रशासन इसे सुधार और आत्मनिर्भरता की प्रक्रिया का हिस्सा बताता रहा है।
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
करीब 500 गणेश प्रतिमाओं की यह पहल दो संदेश एक साथ देती है। पहला, त्योहार को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ मनाया जा सकता है। दूसरा, जेल में बंद लोगों को कौशल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर पुनर्वास की दिशा में अवसर दिए जा सकते हैं। यही वजह है कि इस बार रायपुर केंद्रीय जेल से निकलने वाले गणपति केवल घरों में विराजेंगे ही नहीं, बल्कि विसर्जन के बाद हरियाली की एक नई शुरुआत का जरिया भी बन सकते हैं।