भोपाल, 10 सितंबर 2026 | भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे MBBS इंटर्न डॉक्टरों पर कथित बल प्रयोग और वाटर कैनन के इस्तेमाल का मामला अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने पूरे घटनाक्रम की Administrative Inquiry कराने का फैसला किया है। गृह विभाग की सचिव शिल्पा गुप्ता को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उन्हें एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट शासन को देनी होगी। यह मामला 7 सितंबर को गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल क्षेत्र में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ और डॉक्टरों ने लाठीचार्ज का भी आरोप लगाया था।
शिल्पा गुप्ता जांचेंगी- क्या जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल हुआ?
प्रशासनिक जांच में सबसे अहम सवाल यह होगा कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम परिस्थितियों के अनुरूप थे या नहीं। जांच में वाटर कैनन के इस्तेमाल, कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग की मात्रा की पड़ताल होगी। यह भी देखा जाएगा कि मौके पर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनी थीं, जिनमें पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और क्या उपलब्ध दूसरे विकल्पों का पर्याप्त इस्तेमाल किया गया था।
एक सप्ताह में सरकार को देनी होगी रिपोर्ट
राज्य शासन ने जांच को लंबा खींचने के बजाय समय-सीमा तय की है। गृह सचिव शिल्पा गुप्ता को एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। रिपोर्ट में यदि किसी स्तर पर जरूरत से अधिक बल प्रयोग या प्रक्रिया में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। हालांकि किसी अधिकारी को अभी जांच पूरी होने से पहले दोषी नहीं माना जाना चाहिए।
दो पुलिसकर्मी पहले ही Line Attach
इस मामले में कार्रवाई का एक चरण पहले ही शुरू हो चुका है। बुधवार को दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया। सरकार और डॉक्टर प्रतिनिधियों की बातचीत के बाद यह कदम सामने आया। इससे पहले भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई की जांच के आदेश दिए थे और DCP Zone-2 विकास शाहवाल को जांच सौंपी गई थी। अब शासन स्तर पर अलग प्रशासनिक जांच गृह सचिव को दी गई है।
अब ₹21,500 मिलेगा इंटर्न डॉक्टरों को स्टाइपेंड
इस पूरे आंदोलन के बीच डॉक्टरों की प्रमुख मांग पर भी सरकार ने फैसला कर लिया है। इंटर्न डॉक्टरों का मौजूदा स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹21,500 प्रति माह करने पर सहमति बनी है। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की इंटर्न डॉक्टरों, Junior Doctors Association और Medical Teachers Association के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद सरकार ने 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला किया। इसके बाद तीन दिन से चल रहा आंदोलन समाप्त हो गया।
₹30 हजार मांग रहे थे इंटर्न डॉक्टर
इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपना मासिक स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे थे। 7 सितंबर को इसी मांग को लेकर गांधी मेडिकल कॉलेज से मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च की तैयारी की गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों पर लाठियां भी चलाई गईं।
प्रदर्शन से दो दिन तक ट्रैफिक रहा बेहाल
आंदोलन का असर भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था पर भी पड़ा। कमला पार्क से पॉलीटेक्निक चौराहा, रेतघाट, VIP रोड, मोती मस्जिद, गिन्नौरी और पीरगेट तक कई मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। मंगलवार को कई स्कूल बसें भी जाम में फंसीं और एंबुलेंस को आगे बढ़ने में परेशानी हुई। एक मौके पर प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने एंबुलेंस को रास्ता भी दिया।
अस्पताल की सेवाएं भी हुई थीं प्रभावित
आंदोलन के दौरान हमीदिया अस्पताल सहित प्रदेश के कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नियमित OPD और elective services पर असर पड़ा। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई थीं। तीन दिन के आंदोलन के बाद स्टाइपेंड बढ़ोतरी पर सहमति बनने से स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने का रास्ता साफ हुआ।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
स्टाइपेंड विवाद फिलहाल समझौते के बाद शांत हो गया है, लेकिन 7 सितंबर की पुलिस कार्रवाई का मामला अभी खत्म नहीं हुआ है।
अब सबकी नजर गृह सचिव की प्रशासनिक जांच पर होगी। रिपोर्ट यह स्पष्ट करेगी कि वाटर कैनन और अन्य बल प्रयोग किन परिस्थितियों में किया गया और उसमें तय पुलिस प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।