भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। राज्य में Hospital Management Information System (HMIS/HIMS) के जरिए अस्पतालों की व्यवस्थाओं को ऑनलाइन करने की तैयारी है। इसके तहत 1 नवंबर से सरकारी अस्पतालों में पेपरलेस व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। मरीजों को OPD में पर्ची के लिए कागज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और संबंधित जानकारी मोबाइल के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर है। अस्पतालों में पर्याप्त टैबलेट, डिजिटल उपकरण और कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलने की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को HIMS के जरिए डिजिटल करने की पहल का उल्लेख सामने आया है।
बिहार मॉडल की तर्ज पर लागू होगा
मध्य प्रदेश में तैयार की जा रही डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को बिहार मॉडल की तर्ज पर लागू करने की बात सामने आई है। HMIS के माध्यम से अस्पताल की अलग-अलग प्रक्रियाओं को एक डिजिटल सिस्टम से जोड़ने का उद्देश्य है। इससे मरीज का रजिस्ट्रेशन, OPD प्रक्रिया, डॉक्टर की विजिट और अन्य अस्पताल संबंधी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज किए जा सकेंगे। इससे कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने और मरीजों की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल पर मिलेगा OPD पर्चा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव मरीजों के लिए OPD पर्चे का डिजिटल होना होगा। मरीज के अस्पताल पहुंचने और OPD में रजिस्ट्रेशन के बाद पर्चे से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराए जाने की योजना है। इससे मरीज को हर बार कागज की पर्ची संभालकर रखने की जरूरत कम होगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से भविष्य में मरीज के अस्पताल आने पर पिछली जानकारी को सिस्टम में देखने की सुविधा भी बेहतर हो सकती है।
पेपरलेस होने से क्या बदलेगा?
पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पतालों में कई प्रक्रियाओं के डिजिटल होने की उम्मीद है।
- OPD रजिस्ट्रेशन डिजिटल तरीके से होगा।
- मरीज की जानकारी HMIS में दर्ज की जाएगी।
- OPD पर्चा मोबाइल पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।
- अस्पताल के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की व्यवस्था होगी।
- कागज और प्रिंटिंग पर होने वाला खर्च कम हो सकता है।
- मरीजों के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल सिस्टम के जरिए तलाशना आसान हो सकता है।
- अस्पताल प्रशासन को मरीजों और सेवाओं से संबंधित डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
सबसे बड़ी चुनौती: पर्याप्त टैबलेट और उपकरण
योजना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अस्पतालों में 1 नवंबर तक जरूरी डिजिटल संसाधन उपलब्ध हो पाएंगे? कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या काफी अधिक होती है। ऐसे में प्रत्येक काउंटर और संबंधित कर्मचारी के पास पर्याप्त टैबलेट या कंप्यूटर नहीं होने पर डिजिटल प्रक्रिया लागू करना मुश्किल हो सकता है। अगर उपकरण कम हुए तो रजिस्ट्रेशन और OPD की प्रक्रिया में भीड़ बढ़ने और मरीजों को परेशानी होने की आशंका है।
कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी सवाल
सिर्फ सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को HMIS के इस्तेमाल की पर्याप्त ट्रेनिंग देना भी जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन काउंटर, OPD स्टाफ, डॉक्टरों और अन्य संबंधित कर्मचारियों को यह समझना होगा कि मरीज की जानकारी किस तरह दर्ज करनी है, डिजिटल पर्चा कैसे जारी करना है और सिस्टम में आने वाली तकनीकी समस्या का समाधान कैसे करना है। कम समय में व्यवस्था लागू होने की स्थिति में प्रशिक्षण को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
मरीजों के लिए भी जरूरी होगी डिजिटल जागरूकता
पेपरलेस व्यवस्था का लाभ लेने के लिए मरीजों को भी डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए। खासकर बुजुर्ग, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज और ऐसे लोग जो स्मार्टफोन या डिजिटल सेवाओं का नियमित इस्तेमाल नहीं करते, उनके लिए शुरुआती दौर में सहायता की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए अस्पतालों में हेल्प डेस्क या सहायता काउंटर की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, ताकि डिजिटल पर्ची या रजिस्ट्रेशन में परेशानी होने पर मरीजों को तत्काल मदद मिल सके।
इंटरनेट और तकनीकी व्यवस्था भी अहम
पेपरलेस सिस्टम की सफलता केवल सॉफ्टवेयर पर निर्भर नहीं करेगी। अस्पतालों में लगातार और भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, कंप्यूटर/टैबलेट और तकनीकी सपोर्ट की जरूरत होगी। अगर सर्वर या इंटरनेट में समस्या आती है तो OPD रजिस्ट्रेशन जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए डिजिटल व्यवस्था के साथ बैकअप सिस्टम रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
1 नवंबर से व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। एक तरफ सरकार अस्पतालों को आधुनिक और डिजिटल बनाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन की तैयारी सुनिश्चित करना जरूरी होगा। यदि उपकरण और प्रशिक्षण समय पर उपलब्ध कराए जाते हैं तो यह बदलाव सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को काफी हद तक बदल सकता है। लेकिन पर्याप्त तैयारी के बिना इसे लागू करने पर शुरुआती दिनों में मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डिजिटल हेल्थ सिस्टम से लंबे समय में फायदा
HMIS का उद्देश्य केवल कागज खत्म करना नहीं है। एक व्यवस्थित डिजिटल हेल्थ सिस्टम के जरिए अस्पतालों में मरीजों से जुड़ा डेटा बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। भविष्य में यही डिजिटल रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन, मरीजों की संख्या, सेवाओं की निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बनाने में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।
फिलहाल नजर 1 नवंबर पर
मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों को पेपरलेस बनाने की योजना स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। मोबाइल पर OPD पर्चा मिलने से मरीजों को सुविधा मिल सकती है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों में टैबलेट और अन्य संसाधन कितनी जल्दी उपलब्ध कराए जाते हैं और कर्मचारियों को कितना प्रभावी प्रशिक्षण मिलता है। यानी 1 नवंबर की तारीख सिर्फ पेपरलेस सिस्टम की शुरुआत नहीं, बल्कि इसकी जमीनी तैयारी की भी परीक्षा होगी।