नई दिल्ली - दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा के साथ ऐसा हुआ, जिसकी शायद उन्हें भी उम्मीद नहीं रही होगी। टीम के नौ विकेट गिर चुके थे और तिलक वर्मा अपने शतक से महज एक रन दूर थे। हर किसी को उम्मीद थी कि कप्तान किसी तरह वह एक रन बनाकर अपना शतक पूरा कर लेंगे, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। तिलक 99 रन के निजी स्कोर पर आउट होकर पवेलियन लौट गए।
ईस्ट जोन ने खड़ा किया 708 रन का विशाल स्कोर
साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन ने पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी की। टीम ने 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। ईस्ट जोन की इस पारी के सबसे बड़े नायक कप्तान ईशान किशन रहे, जिन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 270 रन बनाए। उनके दमदार प्रदर्शन की बदौलत ईस्ट जोन ने साउथ जोन पर शुरुआत से ही दबाव बना दिया।
साउथ जोन के विकेट लगातार गिरते रहे
708 रन के जवाब में साउथ जोन की पारी शुरू हुई तो टीम के बल्लेबाज ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और टीम मुश्किल में फंसती चली गई। इस दौरान कप्तान तिलक वर्मा ने एक छोर संभाल लिया। उन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए टीम की पारी को संभालने की कोशिश की। बाकी बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने के बावजूद तिलक क्रीज पर डटे रहे।
तीसरे दिन नाबाद लौटे थे तिलक
मैच के तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक साउथ जोन के छह विकेट गिर चुके थे। तिलक वर्मा क्रीज पर मौजूद थे और उनका शतक लगभग तय माना जा रहा था। चौथे दिन भी साउथ जोन के विकेट गिरने का सिलसिला नहीं रुका। हालांकि तिलक ने दूसरे छोर से लगातार रन बनाने जारी रखे और धीरे-धीरे अपने शतक के करीब पहुंच गए।
99 पर पहुंचते ही टूट गया शतक का सपना
जब साउथ जोन के नौ विकेट गिर गए, तब मुकाबले का रोमांच और बढ़ गया। तिलक वर्मा 99 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे और शतक पूरा करने के लिए उन्हें सिर्फ एक रन चाहिए था। ऐसे में सभी की निगाहें तिलक पर टिक गईं। उम्मीद थी कि वह किसी तरह एक रन लेकर अपना शतक पूरा कर लेंगे। लेकिन इसी दौरान उनकी अपनी गलती भारी पड़ गई और वह 99 रन पर आउट हो गए।
तिलक के आउट होते ही साउथ जोन की पारी समाप्त हो गई और उनके शतक से महज एक रन पहले ही कहानी खत्म हो गई। कप्तान की इस पारी में धैर्य और संघर्ष तो देखने को मिला, लेकिन 99 पर विकेट गंवाने का अफसोस लंबे समय तक रहेगा।
शतक से चूके, लेकिन पारी ने छोड़ी छाप
तिलक वर्मा भले ही अपना शतक पूरा नहीं कर सके, लेकिन दबाव में खेली गई उनकी पारी साउथ जोन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही। एक तरफ विकेट गिरते रहे और दूसरी ओर कप्तान अकेले मोर्चा संभाले रहे। दलीप ट्रॉफी फाइनल की इस पारी में तिलक के लिए सबसे बड़ी कसक यही रही कि शतक से सिर्फ एक रन दूर होने के बावजूद वह सेंचुरी पूरी नहीं कर सके।