नई दिल्ली: गणेशोत्सव की शुरुआत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है। भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त घरों में बप्पा की प्रतिमा स्थापित करते हैं। साल 2026 में गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होगा। अगर आप भी इस साल घर में गणपति बप्पा को विराजमान करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा की विधि के साथ स्थापना की दिशा और स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा रखने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं घर में गणपति स्थापना से जुड़े जरूरी नियम।
गणेश जी की मूर्ति के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए भी इस दिशा को विशेष महत्व दिया जाता है। अगर ईशान कोण में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, तो गणेश जी की प्रतिमा को उत्तर या पश्चिम दिशा में भी स्थापित किया जा सकता है। स्थापना के लिए चुनी गई जगह साफ-सुथरी और व्यवस्थित होनी चाहिए।
गणपति बप्पा का मुख किस ओर होना चाहिए?
गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय उनके मुख की दिशा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, गणपति बप्पा का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए, ताकि भक्त पूजा के दौरान उनके सम्मुख बैठ सकें।
वहीं, उनकी पीठ दीवार या घर के बाहर की ओर होनी चाहिए। धार्मिक मान्यता में गणेश जी की पीठ को लेकर विशेष धारणा है। माना जाता है कि भगवान गणेश के सम्मुख भाग में सुख-समृद्धि का वास होता है, जबकि उनकी पीठ की ओर दरिद्रता का संबंध माना गया है। इसी कारण प्रतिमा को इस तरह रखने की परंपरा है कि उनकी पीठ घर के खुले या मुख्य हिस्से की तरफ न हो।
ध्यान दें: ये बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं, इनके वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
गणेश जी की मूर्ति कहां नहीं रखनी चाहिए?
- गणपति की प्रतिमा को किसी भी ऐसे स्थान पर रखने से बचना चाहिए जहां नियमित रूप से गंदगी रहती हो या पूजा करना मुश्किल हो। पूजा स्थल स्वच्छ, शांत और पवित्र होना चाहिए।
- गणेश जी की प्रतिमा को सीधे फर्श पर रखने के बजाय साफ चौकी या पाटे पर स्थापित करना शुभ माना जाता है। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर प्रतिमा रखी जा सकती है।
कैसी गणेश प्रतिमा घर लानी चाहिए?
गणेश चतुर्थी पर घर में स्थापित की जाने वाली प्रतिमा को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हैं। सामान्य तौर पर मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि गणेशोत्सव के बाद मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन अपेक्षाकृत आसानी से किया जा सकता है। प्रतिमा चुनते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखा जा सकता है।
गणपति स्थापना के समय इन बातों का रखें ध्यान
- गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल और चौकी को अच्छी तरह साफ करें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर विधि-विधान के अनुसार गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद उनका ध्यान और आह्वान कर पूजा की जाती है।
- गणपति स्थापना के बाद जितने दिनों तक बप्पा घर में विराजमान रहें, उस दौरान पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। रोजाना सुबह-शाम आरती और भगवान गणेश को भोग लगाने की भी परंपरा है।
गणपति के सामने रखें इन बातों का ध्यान
गणेशोत्सव के दौरान पूजा स्थल को साफ रखें और प्रतिमा के आसपास अनावश्यक सामान जमा न होने दें। बप्पा को नियमित रूप से फूल, दूर्वा और भोग अर्पित करें। पूजा के समय परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा के साथ आरती में शामिल हो सकते हैं।
विसर्जन के समय भी स्थानीय परंपरा और प्रशासन द्वारा बताए गए नियमों का पालन करना चाहिए। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा और निर्धारित विसर्जन स्थल को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प है।
गणेश चतुर्थी 2026 पर याद रखें ये जरूरी बातें
- गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 से होगी।
- गणपति स्थापना के लिए ईशान कोण को शुभ माना जाता है।
- विकल्प के तौर पर उत्तर या पश्चिम दिशा में भी प्रतिमा रखी जा सकती है।
- गणपति बप्पा का मुख घर के अंदर की ओर रखने की मान्यता है।
- प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखने के बजाय चौकी पर स्थापित करें।
- पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता बनाए रखें।
- दूर्वा, फूल और मोदक से गणेश जी की पूजा की जाती है।
- विसर्जन के दौरान स्थानीय नियमों और पर्यावरण का ध्यान रखें।