भोपाल, 9 सितंबर 2026 | मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल यानी SAF/विसबल में पदोन्नति के नियम बदलने की तैयारी है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू हुई तो ASI से SI और SI से Inspector बनने के लिए फील्ड ड्यूटी का अनुभव जरूरी हो सकता है। यानी लंबे समय तक केवल मुख्यालय, कार्यालय या दूसरे गैर-फील्ड पदों पर तैनात रहने वाले अधिकारियों के प्रमोशन पर असर पड़ सकता है। पुलिस मुख्यालय ने पदोन्नति नियमों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। जानकारी के मुताबिक DGP स्तर से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है। गृह विभाग की स्वीकृति और आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए नियम प्रभावी होंगे।
ASI से SI और SI से Inspector के प्रमोशन पर असर
प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर SAF के उन अधिकारियों पर पड़ेगा जो सहायक उपनिरीक्षक से उपनिरीक्षक और उपनिरीक्षक से निरीक्षक पद पर पदोन्नति की कतार में हैं। प्रस्ताव में फील्ड अनुभव को प्रमोशन की पात्रता से जोड़ने की तैयारी है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना बताया जा रहा है कि वरिष्ठ पद पर पहुंचने से पहले अधिकारी कानून-व्यवस्था, फोर्स मूवमेंट और मैदानी पुलिसिंग से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव हासिल करें। हालांकि कितने महीने या कितने साल की फील्ड ड्यूटी अनिवार्य होगी, यह बात अंतिम संशोधित नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
Constable और Head Constable के नियम नहीं बदलेंगे
प्रस्तावित संशोधन फिलहाल सिपाही और प्रधान आरक्षक/हवलदार की पदोन्नति व्यवस्था के लिए नहीं बताया गया है। यानी बदलाव का फोकस ASI से ऊपर के उन पदों पर है, जहां अधिकारियों को फील्ड कमांड और कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं।
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी किसी अधिकारी का प्रमोशन केवल इसी प्रस्ताव के आधार पर नहीं रोका जा सकता। फिलहाल मामला प्रस्ताव के स्तर पर है। गृह विभाग से अंतिम मंजूरी मिलने और संशोधित नियम जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नई शर्त कब से लागू होगी और पहले से सेवा में मौजूद अधिकारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा। इसलिए फिलहाल “बिना फील्ड ड्यूटी प्रमोशन बंद” की जगह “बिना फील्ड अनुभव प्रमोशन मुश्किल हो सकता है” लिखना ज्यादा तथ्यात्मक रहेगा।
SAF के लिए पहले से अलग Promotion Rules
मध्य प्रदेश विधानसभा में उपलब्ध सरकारी जवाबों के मुताबिक विशेष सशस्त्र बल की पदोन्नति के लिए GOP 141/2012 समेत संबंधित नियम लागू हैं। वहीं जिला पुलिस बल के लिए GOP 138/12 सहित अन्य नियमों का उल्लेख मिलता है। इसलिए SAF के प्रस्ताव को सामान्य रूप से “विसबल पदोन्नति नियम-2012 में संशोधन” कहा जा सकता है, लेकिन अंतिम खबर में GOP 141/2012 का उल्लेख करना ज्यादा तकनीकी रूप से सटीक रहेगा।
विधानसभा में भी उठा था SAF Promotion का मुद्दा
फरवरी 2026 में मध्य प्रदेश विधानसभा में विशेष सशस्त्र बल के कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़ा सवाल उठा था। सरकार ने तब कहा था कि जिला पुलिस बल और विशेष सशस्त्र बल में पद रिक्त होने पर वरिष्ठता और लागू नियमों के अनुसार पदोन्नति की कार्रवाई की जाती है। सरकार ने यह भी कहा था कि SAF कंपनियों का रोटेशन कानून-व्यवस्था और उपलब्ध बल की स्थिति के अनुसार किया जाता है।
क्यों जरूरी मानी जा रही Field Duty?
SAF के अधिकारियों को कई बार VVIP सुरक्षा, चुनाव, कानून-व्यवस्था, संवेदनशील तैनाती और दूसरे मैदानी ऑपरेशन में काम करना पड़ता है। ऐसे में वरिष्ठ पद पर पदोन्नति से पहले मैदानी अनुभव को जरूरी बनाने के पीछे तर्क यह हो सकता है कि अधिकारी को केवल प्रशासनिक काम ही नहीं, बल्कि वास्तविक फोर्स मैनेजमेंट और फील्ड परिस्थितियों का भी अनुभव हो। हालांकि यह सरकार/पुलिस मुख्यालय की प्रस्तावित नीति का औचित्य है; अंतिम नियम जारी होने के बाद ही इसकी पूरी शर्तें सामने आएंगी।
'ऑफिस या बंगले में रहकर प्रमोशन' वाली भाषा से बचें
इस बदलाव को लेकर “ऑफिस या बंगले में रहकर अब प्रमोशन नहीं मिलेगा” जैसी चर्चा हो सकती है, लेकिन इसे आधिकारिक नियम की भाषा नहीं मानना चाहिए। किसी अधिकारी की गैर-फील्ड पोस्टिंग भी विभागीय आवश्यकता पर हो सकती है। इसलिए प्रोफेशनल खबर में “फील्ड अनुभव को अनिवार्य पात्रता बनाने की तैयारी” लिखना ज्यादा सही रहेगा।
अब गृह विभाग के फैसले पर नजर
DGP स्तर से प्रस्ताव आगे बढ़ने के बाद अब अंतिम नजर गृह विभाग पर रहेगी। यदि विभाग इसे मंजूरी देता है तो संशोधित नियम जारी होंगे। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फील्ड पोस्टिंग की न्यूनतम अवधि क्या होगी, किन पदस्थापनाओं को Field Duty माना जाएगा और पुराने सेवा रिकॉर्ड वाले अधिकारियों के लिए कोई transitional provision रखा जाएगा या नहीं।