भोपाल/सागर, 9 सितंबर 2026 | मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए इसे देश की “सबसे भ्रष्ट सरकार” बताया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सागर शराब कांड के साथ इंदौर के दूषित पानी और पिछले साल सामने आए जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद कुछ गिरफ्तारियां, अधिकारियों के निलंबन और जांच की घोषणा होती है, लेकिन जवाबदेही आगे नहीं बढ़ती।
राहुल बोले- आखिर जवाबदेही कहां है?
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में लंबे समय से भाजपा के शासन का हवाला देते हुए सवाल किया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जाते। उन्होंने मांग की कि जांच सिर्फ छोटे अधिकारियों या कर्मचारियों तक सीमित न रहे। जांच में जिस अधिकारी, कारोबारी या नेटवर्क की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
‘दवा जहरीली, पानी जहरीला, शराब जहरीली’
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में तीन घटनाओं को जोड़कर राज्य सरकार पर हमला किया। उन्होंने इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों, कफ सिरप से बच्चों की मौत के पुराने मामले और अब सागर शराब कांड का उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप है कि हादसों के बाद नए नियम या जांच तो घोषित होती है, लेकिन रोकथाम और जवाबदेही के स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। ये आरोप राजनीतिक हैं और राज्य सरकार ने जहरीली शराब मामले में जांच तथा कार्रवाई शुरू कर दी है।
आखिर सागर में हुआ क्या?
सागर जिले की बंडा तहसील के नौराज, घूघरा खुर्द, बराज और आसपास के गांवों में लोगों की तबीयत कथित रूप से अवैध या नकली शराब पीने के बाद बिगड़ी। शुरुआती मरीजों में उल्टी, चक्कर, कमजोरी और आंखों से संबंधित गंभीर लक्षण सामने आए। शुरुआती पोस्टमॉर्टम में मिथाइल अल्कोहल यानी methanol poisoning की आशंका जताई गई, लेकिन सभी मौतों का अंतिम कारण जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही निश्चित होगा।
Death Toll पर क्यों है भ्रम?
सागर शराब कांड में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। 9 सितंबर की ताजा जानकारी में सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने 15 मौतों की पुष्टि की है। वहीं मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने 19 मृतकों की सूची का जिक्र किया। दूसरी ओर कुछ मीडिया और स्थानीय स्रोत कुल मौतों की संख्या 22 से 25 तक बता रहे हैं। इसलिए खबर में फिलहाल सबसे सुरक्षित भाषा है—“जिला प्रशासन ने 15 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि गैर-आधिकारिक रिपोर्टों में संख्या अधिक बताई जा रही है।”
कितने मरीज अस्पताल में?
यहां भी आंकड़े समय के साथ बदलते रहे हैं। सोमवार तक कुछ रिपोर्टों में 96 से लेकर 160 से ज्यादा लोगों के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने की जानकारी थी। लेकिन मंगलवार देर रात कलेक्टर के मुताबिक 8 मरीज critical care में और 45 हल्के लक्षण वाले मरीज अस्पताल में निगरानी में थे, यानी उस समय 53 मरीज अस्पताल में भर्ती बताए गए। नए मरीजों का आना भी कम हुआ है। इसलिए आपकी कॉपी में “130 से ज्यादा अभी अस्पताल में भर्ती हैं” लिखना आज के अपडेट के अनुसार सही नहीं होगा।
UP के Lalitpur तक पहुंची जांच
पुलिस की जांच में सागर शराब कांड का कनेक्शन पड़ोसी उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़े कथित नकली शराब नेटवर्क तक पहुंचा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि नकली शराब कहां बनाई गई, उसे किस तरह पैक किया गया और सागर के गांवों तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक शराब को असली ब्रांड जैसा दिखाने के लिए नकली रैपर और QR कोड तक इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।
30 आरोपियों पर केस, कई गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। 30 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और मंगलवार तक अलग-अलग रिपोर्टों में 14 से 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। बंडा क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। SDM और SDOP स्तर पर बदलाव किए गए और कई अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
CM डॉ. मोहन यादव ने दिए थे जांच के आदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना सामने आने के बाद प्रभारी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल जांच के निर्देश दिए थे। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी। जिला प्रशासन ने अलग से मजिस्ट्रियल जांच भी शुरू की है, जिसमें मौतों के वास्तविक कारण, शराब के निर्माण-सप्लाई नेटवर्क और संभावित विभागीय लापरवाही की जांच की जाएगी।
राहुल गांधी की मांग- सिर्फ छोटी मछलियों पर कार्रवाई न हो
राहुल गांधी ने कहा कि मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार बताकर जांच खत्म नहीं की जानी चाहिए। उनकी मांग है कि शराब के अवैध नेटवर्क से लेकर प्रशासनिक निगरानी तक पूरी चेन की जांच हो और जिसके खिलाफ भी सबूत मिलें, उसके पद या राजनीतिक प्रभाव की परवाह किए बिना जवाबदेही तय की जाए।
अब सागर जहरीली शराब कांड केवल एक आपराधिक और स्वास्थ्य आपदा नहीं रहा, बल्कि मध्य प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही और अवैध शराब के नेटवर्क को लेकर बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।