भोपाल, 8 सितंबर 2026 | मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है। पुलिस मुख्यालय भोपाल ने 223 कार्यवाहक निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों को निरीक्षक पद पर पदोन्नत करने का आदेश जारी किया है। विभागीय पदोन्नति समिति की रिव्यू प्रक्रिया के बाद वरिष्ठता के आधार पर इन अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया है। इस पदोन्नति के बाद संबंधित अधिकारियों को मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के तहत Pay Matrix Level-10 का लाभ मिलेगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रमोशन संबंधी मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
223 अधिकारियों को मिला Inspector पद
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नई सूची में कुल 223 अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें कार्यवाहक निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर पर सेवा दे रहे अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें अब रिक्त निरीक्षक पदों के विरुद्ध पदोन्नति दी गई है। नर्मदापुरम सहित अलग-अलग जिलों में पदस्थ अधिकारियों को इस सूची का लाभ मिला है। उदाहरण के तौर पर मोनिका गौर, निरमा वर्मा और नरेंद्र लिल्लोरे को भी निरीक्षक पद पर पदोन्नत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
13 जुलाई को 1,029 अधिकारियों की सूची हुई थी जारी
यह नई पदोन्नति सूची जुलाई में शुरू हुई बड़ी प्रक्रिया की अगली कड़ी है। पुलिस मुख्यालय ने 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कुल 1,029 कार्यवाहक निरीक्षक/उपनिरीक्षक स्तर के कर्मचारियों से संबंधित पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। बाद में विभागीय पदोन्नति समिति की समीक्षा के आधार पर नई सूची जारी की गई। इससे पहले जुलाई में पुलिस विभाग के अन्य संवर्गों में भी बड़े पैमाने पर प्रमोशन आदेश जारी किए गए थे।
प्रमोशन के साथ मिलेगा Level-10 Pay Matrix
नई पदोन्नति के बाद संबंधित अधिकारियों का वेतन मध्य प्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के Pay Matrix Level-10 के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। पुराने वेतनमान में निरीक्षक पद के लिए ₹9,300-34,800 के साथ ₹4,200 ग्रेड पे का उल्लेख मिलता है। सातवें वेतनमान व्यवस्था में इसके समकक्ष भुगतान Level-10 के तहत किया जाता है। अधिकारियों को वास्तविक वेतन लाभ कार्यभार ग्रहण करने और विभागीय वेतन निर्धारण प्रक्रिया पूरी होने के अनुसार मिलेगा।
सभी अधिकारियों को तुरंत नहीं मिलेगा प्रमोशन का लाभ
पुलिस मुख्यालय ने साफ किया है कि सूची में नाम होने के बावजूद कुछ स्थितियों में अधिकारी को पदोन्नत पद पर कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी निलंबित है, उसके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, आपराधिक मामले में चार्जशीट पेश हो चुकी है, उस पर प्रभावी दंड है या उसने अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है, तो उसके मामले में निर्धारित प्रक्रिया लागू होगी। अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी नहीं करने वाले अधिकारी को रिलीव करने पर संबंधित इकाई प्रमुख की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
Supreme Court के फैसले के अधीन रहेगी पदोन्नति
इस पदोन्नति आदेश का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला है। मध्य प्रदेश की पदोन्नति व्यवस्था से जुड़ा विवाद SLP/Civil Appeal No. 13954/2016 से संबंधित है। मध्य प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य की पुरानी पदोन्नति व्यवस्था पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 मई 2016 को यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। इसी कारण लंबे समय तक नियमित पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित रही। नई पदोन्नतियां भी न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।
पुलिस विभाग में क्यों अहम है यह प्रमोशन?
प्रदेश में निरीक्षक और उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी थानों, पुलिस लाइन और विभिन्न शाखाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। कई अधिकारी लंबे समय से उच्च पद का कार्यवाहक प्रभार संभाल रहे थे। पदोन्नति मिलने से विभाग को रिक्त निरीक्षक पदों को भरने में मदद मिलेगी और अधिकारियों की वरिष्ठता तथा वेतनमान से जुड़े लंबित मामलों में भी राहत मिलेगी।
Seniority के आधार पर तय होगी पदस्थापना
पदोन्नत अधिकारियों को निरीक्षक के रिक्त पदों पर विभागीय जरूरत और वरिष्ठता के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि प्रमोशन मिलना और किसी विशेष थाना या इकाई में पोस्टिंग मिलना दो अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए सूची में नाम आने का अर्थ यह नहीं कि हर अधिकारी को तत्काल थाना प्रभारी की जिम्मेदारी मिल जाएगी।
पूरी सूची में 223 नाम
नई सूची में रवीन्द्र कुमार जाटव, पूर्वा चौरसिया, ब्रजेंद्र सिंह सेंगर, ओमेश्वर ठाकरे, निरूपा पांडे, महेश लिलहारे, पल्लवी पांडे, निवेदिता सोनी, सरस्वती तिवारी, धर्मेंद्र सिंह धुर्वे, बलवंत सिंह टेकाम, कीर्ति भदौरिया, रेखा सेंगर, जितेंद्र सिंह जादौन, नरेंद्र लिलहारे, मोनिका गौर, निरमा वर्मा समेत कुल 223 अधिकारियों के नाम शामिल हैं। प्रकाशन में पूरी 223 नामों की सूची देने के बजाय मूल आदेश/PDF को अलग लिंक या फोटो गैलरी के रूप में देना ज्यादा उपयोगी रहेगा।