नई दिल्ली - चीनी की कीमतों में तेजी का दौर अब काफी हद तक खत्म होता नजर आ रहा है। तेजी के दौरान ₹44 प्रति किलो का एक्स-मिल भाव बढ़कर करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गया था। अब सरकारी सख्ती, बाजार में मौजूद अतिरिक्त स्टॉक के निकलने और नई खरीदारी कमजोर पड़ने के कारण एक्स-मिल कीमतें फिर घटकर ₹44-₹45 प्रति किलो के आसपास आ गई हैं।
हालांकि एक्स-मिल स्तर पर हुई करीब ₹26-₹27 प्रति किलो की बढ़ोतरी लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजार में पूरी तरह नहीं दिखा है। फिलहाल उपभोक्ताओं को चीनी करीब ₹60-₹63 प्रति किलो के भाव पर मिल रही है।
एक्स-मिल भाव गिरा, लेकिन रिटेल में राहत का इंतजार
बाजार में एक्स-मिल कीमतों में बदलाव का असर सबसे पहले थोक कारोबार में दिखाई देता है। इसके बाद कीमतों में बदलाव धीरे-धीरे वितरकों और खुदरा दुकानदारों तक पहुंचता है। यही वजह है कि मिल स्तर पर चीनी सस्ती होने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को तुरंत इसका फायदा नहीं मिल पाया है। चीनी उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक, खुदरा बाजार में कीमतों में गिरावट का पूरा असर दिखाई देने में कम से कम 7 से 10 दिन लग सकते हैं।
महंगे पुराने स्टॉक ने भी रोकी कीमतों में गिरावट
रिटेल कीमतों में तुरंत कमी नहीं आने की एक बड़ी वजह तेजी के दौरान खरीदा गया पुराना स्टॉक भी बताया जा रहा है। कारोबारियों ने जब चीनी महंगे दाम पर खरीदी थी, तब एक्स-मिल कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर थीं। ऐसे में कारोबारी उस स्टॉक को अपनी खरीद लागत से नीचे बेचने से बच रहे हैं। जब महंगे भाव वाला पुराना स्टॉक धीरे-धीरे खत्म होगा और कम कीमत पर खरीदी गई चीनी बाजार में पहुंचेगी, तब खुदरा कीमतों में भी गिरावट ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकती है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में क्या रहा भाव?
5 सितंबर को महाराष्ट्र में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-मिल भाव करीब ₹4,350 प्रति क्विंटल रहा। वहीं कर्नाटक में यह कीमत ₹4,380 प्रति क्विंटल दर्ज की गई। इन कीमतों से संकेत मिलता है कि मिल स्तर पर चीनी के भाव तेजी के ऊपरी स्तरों से काफी नीचे आ चुके हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि इसका लाभ थोक और खुदरा बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
सरकार की सख्ती का भी दिखा असर
चीनी की कीमतों में नरमी के पीछे सरकारी कदमों की भी अहम भूमिका बताई जा रही है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी का स्टॉक अधिकतम 15 दिन की जरूरत तक सीमित कर दिया गया। इस व्यवस्था का असर यह हुआ कि जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके रखने वाले कारोबारियों को अपना अतिरिक्त स्टॉक बाजार में निकालना पड़ा। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ी और कीमतों पर बना दबाव कम हुआ।
अगले कुछ दिनों में उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत
फिलहाल एक्स-मिल और खुदरा कीमतों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। हालांकि मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट धीरे-धीरे आगे बढ़ने की उम्मीद है। उद्योग से जुड़े लोगों का अनुमान है कि पुराने महंगे स्टॉक के निकलने के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी के भाव नरम हो सकते हैं। यानी एक्स-मिल स्तर पर चीनी की तेजी लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को इसका पूरा फायदा मिलने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं।