बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर बना हुआ है। गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। जलस्तर में कहीं वृद्धि तो कहीं गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन निचले इलाकों में बाढ़ का संकट बरकरार है। जल संसाधन विभाग के मंगलवार सुबह 6 बजे के आंकड़ों के मुताबिक, कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से एक से करीब तीन मीटर तक ऊपर बह रही हैं। वहीं, राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतों में करीब 29.13 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
पुनपुन नदी सबसे ज्यादा चिंताजनक
पुनपुन नदी का जलस्तर इस समय सबसे अधिक चिंता का कारण बना हुआ है। श्रीपालपुर में नदी का जलस्तर 53.55 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 50.60 मीटर है। यानी पुनपुन यहां खतरे के निशान से 2.95 मीटर ऊपर बह रही है। यहां जलस्तर बढ़ने का सिलसिला जारी है।
बूढ़ी गंडक भी खतरे के निशान से काफी ऊपर
खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 38.56 मीटर दर्ज किया गया है। खतरे का निशान 36.58 मीटर होने के कारण नदी यहां 1.98 मीटर ऊपर बह रही है। यहां भी जलस्तर में बढ़ोतरी का रुझान दर्ज किया गया है।
गंगा कई जगह खतरे के निशान से ऊपर
गंगा नदी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- दीघा घाट: 51.54 मीटर, खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर
- गांधी घाट: 50.31 मीटर, 1.71 मीटर ऊपर
- हाथीदह: 43.41 मीटर, 1.65 मीटर ऊपर
पटना और हाथीदह के इन स्थानों पर जलस्तर में फिलहाल गिरावट का रुझान है। हालांकि गंगा के निचले इलाकों में स्थिति अलग है और कई जगह जलस्तर बढ़ रहा है।
मुंगेर में गंगा 40.08 मीटर, भागलपुर में 34.60 मीटर और कहलगांव में 32.77 मीटर पर बह रही है। इन स्थानों पर नदी खतरे के निशान से क्रमश: 0.75 मीटर, 0.92 मीटर और 1.68 मीटर ऊपर है।
कोसी और गंडक का भी बढ़ा जलस्तर
कोसी नदी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर है। बलतारा में जलस्तर 35.15 मीटर और कुरसेला में 31.40 मीटर दर्ज किया गया। दोनों जगह जलस्तर बढ़ रहा है। बलतारा में कोसी खतरे के निशान से 1.30 मीटर और कुरसेला में 1.40 मीटर ऊपर बह रही है।
गंडक नदी भी डुमरिया घाट और हाजीपुर में खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है। डुमरिया घाट में जलस्तर 62.75 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान से 0.53 मीटर अधिक है। हालांकि यहां जलस्तर में गिरावट का रुझान है।
बागमती और घाघरा की स्थिति भी चिंताजनक
मुजफ्फरपुर में बागमती नदी 48.93 मीटर पर बह रही है। यह खतरे के निशान से 0.25 मीटर ऊपर है। फिलहाल यहां जलस्तर स्थिर बताया गया है। वहीं, घाघरा नदी भी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
प्रमुख बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में कमी
जल संसाधन विभाग के अनुसार, प्रमुख बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में फिलहाल गिरावट का रुझान देखने को मिल रहा है।
- बीरपुर बैराज: कोसी डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 1,77,880 क्यूसेक
- वाल्मीकिनगर बैराज: गंडक डिस्चार्ज 1,04,400 क्यूसेक
- इंद्रपुरी बैराज: सोन नदी डिस्चार्ज 1,02,574 क्यूसेक
डिस्चार्ज में कमी के बावजूद कई नदियों का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, इसलिए प्रशासन की निगरानी जारी है।
13 जिलों में 29 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित
बाढ़ के बढ़ते प्रभाव के कारण बिहार के 13 जिलों में 29.13 लाख के करीब आबादी प्रभावित हुई है। कुल 77 प्रखंडों और 438 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का असर बताया गया है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज किया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, पेयजल और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है।
तटबंधों और नदियों पर लगातार निगरानी
प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें तटबंधों के साथ-साथ प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। खास तौर पर गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक और पुनपुन के उन इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जहां जलस्तर बढ़ने का रुझान दर्ज किया गया है। फिलहाल बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में कमी राहत की बात है, लेकिन निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्य जारी रखा है।