भोपाल। साइबर ठगी का शिकार होने के बाद अब भोपाल के लोगों को तकनीकी मदद के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। भोपाल पुलिस सभी थानों की साइबर डेस्क को मजबूत करने जा रही है। इसके तहत 57 पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। ये प्रशिक्षित पुलिसकर्मी शिकायत मिलते ही शुरुआती तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और पीड़ित को त्वरित सहायता दिलाने में मदद करेंगे।
शिकायत मिलते ही शुरू होगी तकनीकी जांच
नई व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद शुरुआती स्तर पर ही तेजी से कार्रवाई करना है। प्रशिक्षित पुलिसकर्मी शिकायत को संबंधित पोर्टल पर दर्ज करने से लेकर तकनीकी साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। जांच के दौरान जरूरत के अनुसार कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), टावर लोकेशन, IP एड्रेस, URL, बैंक अकाउंट डिटेल और सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे साइबर अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिलेगी।
57 पुलिसकर्मियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग
भोपाल के सभी थानों की साइबर डेस्क पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान 57 आरक्षकों को साइबर क्राइम की विशेष ट्रेनिंग दी गई। इन्हें अलग-अलग थानों की साइबर डेस्क पर तकनीकी और व्यावहारिक कार्यों के लिए लगाया जाएगा।
Facebook, Instagram और X से जुटाई जाएगी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जांच के लिए जरूरी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया भी समझाई गई। इसमें Facebook, Instagram और X जैसे प्लेटफॉर्म से आवश्यक डेटा प्राप्त करने के साथ बैंक से अकाउंट संबंधी जानकारी लेने की प्रक्रिया शामिल है। पुलिसकर्मियों को डेटा रिकवरी, CDR एनालिसिस, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और भौतिक साक्ष्य जुटाने के तरीके भी सिखाए गए।
IP एड्रेस और टावर लोकेशन की जांच पर जोर
एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी डेटा की अहम भूमिका होती है। पुलिसकर्मियों को CDR, टावर लोकेशन, PSTN डेटा, IP एड्रेस और URL जैसी जानकारियां हासिल करने और जांच में उनका इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। गंभीर अपराधों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की स्थिति में तकनीकी माध्यमों से संदिग्धों की पहचान करने के तरीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
साइबर ठगी के नए तरीकों की भी दी गई जानकारी
डीसीपी क्राइम अखिल पटेल ने साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पुलिसकर्मियों को व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण में साइबर अपराध के नए तरीके, डिजिटल फॉरेंसिक, ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया अपराध और तकनीकी अनुसंधान से जुड़े विषय शामिल किए गए। पुलिसकर्मियों को डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा उनकी मदद से जांच को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
भोपाल पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और किसी के साथ OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचने और संदिग्ध ई-मेल, मैसेज या ऐप से दूरी बनाए रखने को कहा गया है।
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत
साइबर ठगी होने की स्थिति में पीड़ित को बिना देरी किए पुलिस या साइबर सेल को सूचना देनी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर बैंकिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े मामलों में कार्रवाई की संभावना बेहतर रहती है। भोपाल पुलिस की नई व्यवस्था से उम्मीद है कि साइबर अपराधों की शुरुआती जांच थाने के स्तर पर ही तेज होगी और पीड़ितों को तत्काल तकनीकी सहायता मिल सकेगी।