Mahakal Sawari 2026: उज्जैन में श्रावण-भाद्रपद माह के अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर की अंतिम और प्रमुख राजसी सवारी आज, 7 सितंबर को नगर भ्रमण पर निकलेगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल रजत पालकी में अपने विभिन्न दिव्य स्वरूपों के साथ नगर भ्रमण करेंगे। इस भव्य आयोजन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की है। राजसी सवारी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। सिंधिया परिवार की ओर से गोपाल मंदिर परंपरा के तहत भगवान महाकाल को स्टेट की पगड़ी भेंट की जाएगी और परिवार की ओर से आरती की परंपरा भी निभाई जाएगी।
अंतिम राजसी सवारी को लेकर उज्जैन में खास तैयारियां
श्रावण-भाद्रपद माह के दौरान निकलने वाली सवारियों में आज की सवारी को विशेष महत्व दिया जाता है। भगवान महाकाल की अंतिम सवारी के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और सवारी मार्ग को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं। सवारी मार्ग को सुबह 6 बजे से बंद कर दिया गया है, जबकि दोपहर 11 बजे से शहर के 32 प्रमुख रास्तों पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
7 किलोमीटर के दायरे में 2 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती
राजसी सवारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए करीब 7 किलोमीटर के दायरे में 2 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सवारी की सुरक्षित आवाजाही को लेकर अलग-अलग स्तर पर व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी रहेगी।
सिंधिया परिवार की ओर से भगवान महाकाल को भेंट होगी पगड़ी
राजसी सवारी में इस बार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। सिंधिया परिवार की ओर से राजसी सवारी में शामिल होने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वे उज्जैन पहुंचेंगे। जब भगवान महाकाल की पालकी गोपाल मंदिर पहुंचेगी, तब सिंधिया परिवार की ओर से स्टेट की पगड़ी भेंट करने की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद सिंधिया परिवार की ओर से आरती की जाएगी।उज्जैन पहुंचने से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया दिवंगत पूर्व मंत्री पारस जैन के घर जाकर शोक संवेदना भी व्यक्त करेंगे।
महाकाल की राजसी सवारी का 8 घंटे होगा सीधा प्रसारण
इस बार भगवान महाकाल की राजसी सवारी का विशेष रेडियो प्रसारण भी किया जाएगा। दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक लगातार 8 घंटे राजसी सवारी का सजीव प्रसारण होगा। आकाशवाणी उज्जैन की इस पहल के तहत मध्यप्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से कार्यक्रम का एक साथ प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रम अधिकारी ब्रह्मप्रकाश चतुर्वेदी के अनुसार, गैर-खेल गतिविधियों के क्षेत्र में इतनी लंबी अवधि का यह एक अनूठा रेडियो प्रसारण होगा। कार्यक्रम प्रमुख अनामिका चक्रवर्ती के मुताबिक, आयोजन को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए नामांकित किया गया है। श्रद्धालु FM 102.5 MHz और News On AIR के माध्यम से राजसी सवारी का प्रसारण सुन सकेंगे।
महाकाल मंदिर से रामघाट तक पहुंचेगी सवारी
भगवान महाकाल की राजसी सवारी महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी। इसके बाद सवारी महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, पानदरीबा, कहारवाड़ी और रामानुजकोट होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया जाएगा। आरती के बाद सवारी आगे के मार्ग पर रवाना होगी। इसके बाद सवारी गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, कमरी मार्ग, टंकी चौक, तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट और खड़े हनुमान होते हुए गोपाल मंदिर पहुंचेगी। गोपाल मंदिर पर सिंधिया स्टेट की ओर से पूजन की परंपरा पूरी होने के बाद सवारी पटनी बाजार, गुदरी और महाकाल घाटी होते हुए वापस महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
पांच स्वरूपों में होंगे भगवान महाकाल के दर्शन
7 सितंबर को निकलने वाली अंतिम राजसी सवारी में भगवान महाकाल के अलग-अलग मुखारविंदों के दर्शन श्रद्धालुओं को होंगे।
सवारी में शामिल प्रमुख स्वरूप इस प्रकार हैं:
रजत पालकी: श्री चन्द्रमौलेश्वर
हाथी पर: श्री मनमहेश
गरुड़ रथ पर: श्री शिवतांडव
नंदी रथ पर: श्री उमा-महेश
डोल रथ पर: श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद और श्री सप्तधान का मुखारविंद
इन दिव्य स्वरूपों के साथ निकलने वाली राजसी सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का प्रमुख हिस्सा है।
श्रद्धालुओं के लिए क्यों खास है आज की सवारी?
श्रावण-भाद्रपद माह में भगवान महाकाल की सवारी की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। मान्यता के अनुसार सवारी के माध्यम से भगवान महाकाल नगर भ्रमण करते हुए अपनी प्रजा का हाल जानने निकलते हैं। अंतिम राजसी सवारी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है। बड़ी संख्या में लोग सवारी मार्ग पर पहुंचकर भगवान महाकाल के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन करते हैं। इसी वजह से प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।
यातायात व्यवस्था को लेकर क्या किए गए इंतजाम?
राजसी सवारी के कारण शहर के प्रमुख हिस्सों में यातायात व्यवस्था बदली गई है। सवारी मार्ग सुबह 6 बजे से बंद रहेगा, जबकि दोपहर 11 बजे से 32 प्रमुख मार्गों पर वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया गया है। इस दौरान श्रद्धालुओं और सवारी की आवाजाही को प्राथमिकता दी जाएगी। शहर में आने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से निर्धारित वैकल्पिक मार्गों और यातायात निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।