Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर संभावित दल-बदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना के शिंदे गुट के विधायक मुरजी पटेल ने दावा किया है कि आने वाले दिनों में राज्य में ‘ऑपरेशन टाइगर-4’ देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के 20 में से 14 विधायक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और जल्द ही शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इन विधायकों के नाम सामने नहीं आए हैं और उनके दल-बदल की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है।
मुरजी पटेल के बयान से महाराष्ट्र की सियासत में हलचल
मुंबई के अंधेरी पूर्व में आयोजित ‘आवाज शिवसेनेचा, जल्लोष स्त्रीशक्तीचा’ कार्यक्रम में मुरजी पटेल ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में ‘ऑपरेशन टाइगर-4’ देखने को मिलेगा और ठाकरे गुट के कई नेता शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। पटेल के अनुसार, पहले ठाकरे गुट के सांसदों के बाद अब विधायकों और फिर बड़ी संख्या में नगरसेवकों के शिंदे गुट में आने की संभावना है। उनके इस बयान के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर संभावित टूट और दल-बदल को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
20 में से 14 विधायक संपर्क में होने का दावा, लेकिन नाम अब भी सामने नहीं
मुरजी पटेल का सबसे बड़ा दावा उद्धव ठाकरे गुट के विधायकों को लेकर है। उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट के कुल 20 विधायकों में से 14 विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। अगर यह दावा भविष्य में सही साबित होता है और इतनी बड़ी संख्या में विधायक पाला बदलते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंधित 14 विधायकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और उनके संभावित दल-बदल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक दावा और संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है।
सांसदों के बाद अब विधायकों और नगरसेवकों पर नजर
मुरजी पटेल का बयान ऐसे समय आया है जब ठाकरे गुट से जुड़े सांसदों और नेताओं के शिंदे गुट में जाने को लेकर पहले से राजनीतिक चर्चा चल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ठाकरे गुट के छह सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद अब विधायकों को लेकर भी अटकलें तेज हुई हैं। पटेल ने संकेत दिया है कि संभावित राजनीतिक बदलाव केवल विधायकों तक सीमित नहीं रह सकता। उनके मुताबिक, इसके बाद ठाकरे गुट से जुड़े कई नगरसेवक भी शिंदे गुट का रुख कर सकते हैं। अगर आने वाले दिनों में ऐसा कोई औपचारिक राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, तो इसका असर मुंबई समेत महाराष्ट्र के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
2022 की बगावत ने बदल दिया था महाराष्ट्र का सत्ता समीकरण
महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को समझने के लिए जून 2022 की शिवसेना बगावत को याद करना जरूरी है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था। इस बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बने। इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना दो प्रमुख राजनीतिक गुटों में बंट गई और दोनों पक्षों के बीच संगठन तथा राजनीतिक विरासत को लेकर संघर्ष जारी रहा। अब ‘ऑपरेशन टाइगर-4’ को लेकर सामने आया दावा उसी लंबे राजनीतिक संघर्ष के अगले अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या सच में होगी बड़ी टूट? सबसे बड़ा सवाल यही
मुरजी पटेल के दावे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर वे 14 विधायक कौन हैं, जिनके शिंदे गुट के संपर्क में होने की बात कही जा रही है। फिलहाल न तो सभी संभावित विधायकों के नाम सामने आए हैं और न ही उनके द्वारा शिंदे गुट में शामिल होने की कोई सार्वजनिक घोषणा की गई है। ऐसे में इस दावे के आधार पर किसी निश्चित दल-बदल का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। हालांकि, अगर आने वाले दिनों में इनमें से बड़ी संख्या में विधायक वास्तव में पाला बदलते हैं, तो इससे शिवसेना (यूबीटी) की विधानसभा में स्थिति और महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
‘ऑपरेशन टाइगर-4’ पर क्या सामने आया है?
‘ऑपरेशन टाइगर-4’ नाम का इस्तेमाल मुरजी पटेल ने संभावित राजनीतिक दल-बदल के संदर्भ में किया है। इससे पहले भी ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा होती रही है। हालिया रिपोर्टों में एकनाथ शिंदे की ओर से संगठन को मजबूत करने और भविष्य में राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने के संकेतों का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए अब नजर इस बात पर है कि क्या मुरजी पटेल का दावा आने वाले दिनों में किसी वास्तविक राजनीतिक घटनाक्रम में बदलता है या यह केवल राजनीतिक बयान तक सीमित रहता है।