MP Police Academy DSP Training 2026: मध्यप्रदेश पुलिस में जल्द ही 17 नए उप पुलिस अधीक्षक (DSP) जिम्मेदारी संभालने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इन अधिकारियों के लिए मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में DSP के 46वें बैच की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो गई है। खास बात यह है कि इस बैच में 11 महिला अधिकारी हैं, जबकि पुरुष अधिकारियों की संख्या छह है। करीब दो साल की प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान इन प्रशिक्षु अधिकारियों को कानून-व्यवस्था, अपराध जांच और पुलिस प्रशासन के साथ आधुनिक पुलिसिंग की तकनीकों से परिचित कराया जाएगा। बदलते अपराध के स्वरूप को देखते हुए ट्रेनिंग में साइबर क्राइम, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक टूल्स और OSINT जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है।
46वें बैच की शुरुआत, 17 अधिकारी ले रहे प्रशिक्षण
मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी में उप पुलिस अधीक्षक के 46वें बैच की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है। इस बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं। अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर रामजी श्रीवास्तव के मुताबिक, प्रशिक्षण में फील्ड पुलिसिंग और व्यावहारिक अनुभव पर विशेष जोर दिया जाएगा। अधिकारियों को सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय वास्तविक पुलिसिंग से जुड़ी परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाएगा। ट्रेनिंग का उद्देश्य ऐसे अधिकारियों को तैयार करना है, जो कानून की जानकारी के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फील्ड में प्रभावी तरीके से काम कर सकें।
नई आपराधिक व्यवस्था के तहत BNS और BNSS की पढ़ाई
DSP प्रशिक्षण में देश में लागू नए आपराधिक कानूनों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्रशिक्षु अधिकारियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही अपराध की जांच, साक्ष्य एकत्र करने और अदालत में साक्ष्यों को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद अधिकारियों को नई कानूनी व्यवस्था के अनुरूप जांच और कार्रवाई करने में सक्षम बनाना है, ताकि कानून के प्रावधानों का सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
साइबर क्राइम से लेकर डिजिटल एविडेंस तक, आधुनिक पुलिसिंग पर फोकस
अपराध के बदलते स्वरूप के साथ पुलिस जांच में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बैच की ट्रेनिंग में डिजिटल एविडेंस कलेक्शन और साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन को भी शामिल किया गया है। प्रशिक्षुओं को फॉरेंसिक टूल्स और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी जांच प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा OSINT यानी Open Source Intelligence के माध्यम से खुले स्रोतों से उपयोगी जानकारी जुटाने और उसे जांच में इस्तेमाल करने की तकनीक भी सिखाई जाएगी। इस तरह अधिकारियों को पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीक आधारित जांच के लिए भी तैयार किया जाएगा।
ड्रिल और परेड के साथ संविधान व मानवाधिकार की भी पढ़ाई
DSP प्रशिक्षण सिर्फ कानून और तकनीकी जांच तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशिक्षु अधिकारियों को भारतीय संविधान, मानवाधिकार और पुलिस नीतिशास्त्र से जुड़े विषयों की भी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ पुलिस ड्रिल, परेड, शारीरिक प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक पुलिसिंग गतिविधियां भी प्रशिक्षण का हिस्सा रहेंगी। प्रशिक्षुओं को वास्तविक मामलों पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास कराने की भी योजना है। इससे उन्हें फील्ड में आने वाली परिस्थितियों को समझने और कानूनी तथा तकनीकी पहलुओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
जनता से संवाद और व्यक्तित्व विकास पर भी रहेगा जोर
एक पुलिस अधिकारी के लिए कानून की जानकारी के साथ जनता के साथ प्रभावी संवाद भी जरूरी है। इसी को देखते हुए प्रशिक्षण में व्यक्तित्व विकास और जनसंवाद से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है। प्रशिक्षुओं को इस तरह तैयार करने पर जोर दिया जाएगा कि वे कानून लागू करने के साथ आम लोगों की समस्याओं को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ समझ सकें। महिला अधिकारियों की बड़ी भागीदारी को भी इस बैच की एक खास विशेषता माना जा रहा है। कुल 17 प्रशिक्षुओं में 11 महिलाएं हैं, जो कुल संख्या का करीब 65 प्रतिशत है।
करीब दो साल चलेगी DSP की प्रशिक्षण प्रक्रिया
DSP के रूप में जिम्मेदारी संभालने से पहले चयनित अधिकारियों को करीब दो साल की प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना होता है। शुरुआती चरण में अकादमी में रहकर उन्हें कानून, पुलिस मैनुअल, हथियार संचालन, शारीरिक प्रशिक्षण और निहत्थे मुकाबले जैसी आवश्यक विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फील्ड से जुड़ा होता है। प्रशिक्षुओं को पुलिस थानों, पुलिस लाइन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव दिया जाता है। इस दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था संभालने, अपराध की जांच करने और पुलिस प्रशासन की वास्तविक कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
प्रशिक्षण के बाद जिलों में संभालेंगे पुलिस की जिम्मेदारी
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये अधिकारी मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस विभाग की जिम्मेदारियां संभालेंगे। उनके सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ अपराध नियंत्रण और जांच जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। वर्तमान दौर में साइबर अपराध और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नई तकनीकों की जानकारी इन अधिकारियों के लिए फील्ड पुलिसिंग में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं, जनसंवाद, मानवाधिकार और पुलिस नीतिशास्त्र पर जोर दिए जाने से अधिकारियों को कानून लागू करने के साथ संवेदनशील पुलिसिंग के लिए भी तैयार किया जाएगा।