नई दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग ढहने और सात लोगों की मौत के बाद नगर निगम दिल्ली (MCD) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर से लेकर बिल्डिंग विभाग के जूनियर इंजीनियर तक शामिल हैं। सोमवार को जारी आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई हादसे के बाद की गई है। वहीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन दूसरे दिन भी जारी रहा। हादसे के बीच अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने पांच अधिकारियों पर की कार्रवाई
सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें प्रशासनिक स्तर से लेकर बिल्डिंग विभाग के फील्ड अधिकारियों तक के नाम शामिल हैं।
निलंबित अधिकारियों की सूची में शामिल हैं:
राकेश कुमार — डिप्टी कमिश्नर, साउथ जोन
रणवीर सिंह — सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, साउथ जोन
ललित कुमार गोयल — एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग), साउथ जोन
सुनील चौहान — असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग), साउथ जोन
आशीष कुमार — जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग)
हादसे के बाद हुई इस कार्रवाई को MCD की ओर से जिम्मेदारी तय करने की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
बेसमेंट में निर्माण कार्य के दौरान ढही थी PG बिल्डिंग
सत्य निकेतन की घनी आबादी वाली कॉलोनी में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई थी। इस भवन का इस्तेमाल छात्रों के लिए बॉयज पेइंग गेस्ट यानी PG आवास के तौर पर किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। बताया गया कि इसी निर्माण कार्य के कारण भवन के ढांचे को नुकसान पहुंचा और बाद में पूरी इमारत ढह गई। हादसे में अब तक सात लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
दूसरे दिन भी मलबे में तलाश जारी
हादसे के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया था। सोमवार को भी दूसरे दिन राहत और बचाव अभियान जारी रहा। बताया गया कि मलबे में दबे लोगों में बड़ी संख्या छात्रों की हो सकती है। बचाव दल संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे।
घटना के बाद दिल्ली सरकार की ओर से भी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए थे। इसके बाद MCD की ओर से पांच अधिकारियों का निलंबन किया गया।
MCD कमिश्नर ने अवैध निर्माण को लेकर क्या बताया?
हादसे के बाद दिल्ली में अवैध और असुरक्षित निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने निगम की ओर से की जा रही कार्रवाई को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सत्य निकेतन इलाके में ही अगस्त महीने के दौरान तीन से चार इमारतों के ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए थे। कमिश्नर के मुताबिक, पिछले तीन महीनों के दौरान करीब 960 इमारतों को गिराया गया, जबकि 407 इमारतों को सील किया गया है। इसके अलावा करीब 1,500 इमारतों को सीलिंग और ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
अनधिकृत निर्माण की पहचान का दावा
MCD कमिश्नर ने कहा कि नगर निगम की ओर से अनधिकृत निर्माण की नियमित रूप से पहचान की जाती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। हालांकि, दिल्ली में मौजूद कुल अनधिकृत इमारतों की संख्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। सत्य निकेतन हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि निर्माण कार्य के दौरान भवन की सुरक्षा और नियमों के पालन की निगरानी में कहां चूक हुई। पांच अधिकारियों के निलंबन के बाद मामले की प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
हादसे के बाद उठे सुरक्षा और निगरानी से जुड़े सवाल
सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बड़ी संख्या में PG और किराये के मकान संचालित होते हैं। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण कार्य के दौरान भवन की संरचनात्मक सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। हादसे के बाद बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य और भवन की निगरानी को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। MCD की ओर से पहले भी अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आंकड़े सामने रखे गए हैं, लेकिन इस घटना ने जमीनी स्तर पर निगरानी और समय रहते कार्रवाई की प्रभावशीलता पर चर्चा तेज कर दी है।