दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुआ बिल्डिंग हादसा मध्यप्रदेश के दो परिवारों के लिए गहरे दुख की खबर लेकर आया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुए इस हादसे में कटनी के अक्षत यादव और देवास के अर्पित जाज की जान चली गई। दोनों युवक दिल्ली में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे थे। एक ओर अक्षत अस्पताल में इलाज के दौरान जिंदगी की जंग हार गए, तो दूसरी ओर सोमवार सुबह रेस्क्यू टीम ने अर्पित को मलबे से बाहर निकाला। घटना के बाद दोनों के घरों में शोक का माहौल है।
अचानक भरभरा कर गिरी करीब चार दशक पुरानी इमारत
सत्य निकेतन में हादसा उस समय हुआ जब करीब 40 साल पुरानी इमारत अचानक ढह गई। इमारत के गिरने के बाद बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया और कई लोग उसके नीचे फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबे में फंसे लोगों को तलाशने और घायलों को बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया गया। इसी दौरान गंभीर हालत में अक्षत को निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
कटनी के अक्षत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में शुरू किया था पढ़ाई का सफर
हादसे में जान गंवाने वाले अक्षत यादव कटनी की दुबे कॉलोनी के रहने वाले थे। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकॉम की पढ़ाई कर रहे थे। बिल्डिंग हादसे के बाद अक्षत को मलबे से निकालकर उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर बनी रही और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार को घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन दिल्ली पहुंचे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अक्षत का शव परिवार को सौंप दिया गया। अब परिजन उनके पार्थिव शरीर को कटनी लेकर लौट रहे हैं।
देवास से रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली लौटे थे अर्पित
इस हादसे में देवास के अर्पित जाज की भी मौत हुई है। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकॉम सेकंड ईयर में पढ़ रहे थे और सत्य निकेतन के हॉस्टल डेज में रहते थे। अर्पित के परिवार के मुताबिक वह कुछ दिन पहले रक्षाबंधन के अवसर पर देवास आए थे। परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद उन्होंने शनिवार को दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ी। रविवार सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पहुंचने के बाद वह अपने हॉस्टल लौटे थे। लेकिन कुछ ही समय बाद हुए हादसे ने परिवार को ऐसी खबर दी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
सोमवार सुबह रेस्क्यू टीम को मिला अर्पित का शव
बचाव अभियान के दौरान सोमवार सुबह अर्पित को मलबे से बाहर निकाला गया। उनके पिता ने शव की पहचान की। अर्पित की मौत की खबर देवास स्थित उनके परिवार तक पहुंची तो घर में मातम छा गया। जय बजरंग नगर स्थित परिवार के घर में कुछ दिन पहले तक रक्षाबंधन की खुशियां थीं, लेकिन अब वहां बेटे के खोने का गम है। परिजन अब अर्पित के पार्थिव शरीर के देवास पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।
हॉस्टल वाली इमारत में चल रहा था मरम्मत का काम
हादसे से जुड़े शुरुआती विवरण में यह बात सामने आई है कि जिस इमारत में अर्पित रह रहे थे, वहां पिछले कुछ समय से मरम्मत का काम चल रहा था। इमारत गिरने की असल वजह क्या थी, इसको लेकर जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि हादसे के पीछे भवन की स्थिति, निर्माण या मरम्मत से जुड़ा कोई पहलू जिम्मेदार था या नहीं।
रेस्क्यू के बीच बढ़ती रही चिंता, 7 लोगों की मौत
सत्य निकेतन हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। बचाव दल ने 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि पांच घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। मलबे में कुछ अन्य लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी रखा गया। टीमों ने मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की। हादसे के कारणों की जांच के साथ-साथ अब इस बात पर भी ध्यान है कि ऐसी इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
छात्रों के रहने वाले इलाकों में भवन सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टल में रहते हैं। ऐसे में किसी पुराने भवन के अचानक गिरने की घटना ने भवनों की सुरक्षा, मरम्मत और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर ऐसी इमारतें जहां छात्र बड़ी संख्या में रहते हैं, वहां निर्माण और मरम्मत से जुड़े काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।