दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों के रहने वाली इमारत ढहने की घटना को लेकर सियासत गरमा गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस हादसे को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि हादसों को रोकने के लिए पहले से जरूरी कदम नहीं उठाए जाते और घटना के बाद कार्रवाई के नाम पर छोटे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य निकेतन की घटना को किसी एक मामले तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में हाल के महीनों में हुई कुछ अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
सत्य निकेतन हादसे को लेकर राहुल गांधी ने उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के लंबे कार्यकाल में हादसों के बाद कार्रवाई का एक जैसा तरीका देखने को मिलता रहा है। उनके मुताबिक, दुर्घटना से पहले रोकथाम पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता और घटना होने के बाद बयान सामने आते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में जिम्मेदारी निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रह जाती है, जबकि बड़े स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती।
दिल्ली की दूसरी घटनाओं का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने सत्य निकेतन हादसे को दिल्ली में हुई दूसरी घटनाओं से जोड़ते हुए सैदुलजाब और हौज रानी का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में हुई ऐसी घटनाओं में लोगों की जान गई है और हर घटना के बाद जवाबदेही को लेकर सवाल उठे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि हादसों के बाद प्रभावित परिवारों को सिर्फ कार्रवाई के आश्वासन के बजाय यह भी बताया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव किए जा रहे हैं।
PM मोदी पर भी राहुल गांधी ने लगाया आरोप
अपने बयान में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से जवाबदेही मांगने वाले लोगों के सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय उनकी छवि पर टिप्पणी की जाती है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री की ओर से सवाल उठाने वालों के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए कुछ आपत्तिजनक विशेषणों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा का उद्देश्य आलोचना करने वालों को दबाना और बदनाम करना है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने कई दूसरे मुद्दों का हवाला देकर मुख्य सवालों से ध्यान हटाया है।
‘ट्रिपल इंजन’ सरकार को लेकर भी साधा निशाना
राहुल गांधी ने दिल्ली की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राजधानी में ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार होने के बावजूद अगर ऐसी घटनाओं के बाद जवाबदेही तय नहीं होती, तो सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने अपने बयान में सरकार की नीयत और जवाबदेही को आपस में जोड़ते हुए कहा कि व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है। हालांकि, राहुल गांधी की ये टिप्पणियां राजनीतिक आरोप और विपक्ष की प्रतिक्रिया हैं। सरकार या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, यह अलग राजनीतिक पक्ष के रूप में देखा जाएगा।
सत्य निकेतन हादसे में 7 लोगों की मौत
दिल्ली पुलिस की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में 7 लोगों की मौत हुई है। मृतकों की पहचान अभिषेक, युवराज सोनी, पवन, अर्पित जहाज, अक्षत सिंह यादव, सुरिंदर सिंह और एक अज्ञात पुरुष के तौर पर बताई गई है। हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया था। मलबे की चपेट में आए लोगों में बड़ी संख्या उन युवाओं की बताई गई है, जो दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।
पांच घायलों का अस्पताल में इलाज जारी
हादसे में गंभीर रूप से घायल असगर अली, नीरज बावा, आदित्य कुमार, नीतीश चिब और मोहम्मद अयान का अस्पताल में उपचार जारी है। हादसे के बाद बचाव दल ने मलबे से लोगों को बाहर निकाला और घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घटना की गंभीरता को देखते हुए अब बिल्डिंग की स्थिति और हादसे के कारणों से जुड़े पहलुओं की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है।
हादसे के बाद सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा फिर चर्चा में
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाले पीजी और हॉस्टल भवनों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुरानी इमारतों की स्थिति, निर्माण या मरम्मत कार्य और सुरक्षा मानकों की निगरानी जैसे मुद्दे अब चर्चा के केंद्र में हैं। राजनीतिक तौर पर भी यह घटना सरकार और प्रशासन की जवाबदेही को लेकर विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े अपडेट इस मामले की दिशा तय करेंगे।