सागर/भोपाल, 8 सितंबर 2026 | मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली और अवैध शराब से हुई मौतों के बाद सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा एक्शन लिया है। बंडा SDM आरती यादव और SDOP प्रदीप वाल्मीकि को हटा दिया गया है। ताजा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक मौतों की संख्या 22 तक पहुंचने की जानकारी है, जबकि बड़ी संख्या में मरीजों का सागर और भोपाल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने शराब ठेकेदार समेत कुल 30 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है और अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस शराब के निर्माण, पैकिंग, बिक्री और सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही है।
बंडा SDM आरती यादव हटाईं
जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की कार्रवाई तेज हो गई है। बंडा SDM आरती यादव को पद से हटाकर सागर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार जैन को बंडा SDM का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। जैन के पास शाहगढ़ का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
SDOP प्रदीप वाल्मीकि को भी हटाया
प्रशासन के बाद पुलिस विभाग में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। बंडा के SDOP प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय भेज दिया गया है। उनकी जगह पुलिस मुख्यालय से DSP रोहित लखारे को बंडा SDOP की जिम्मेदारी दी गई है। यह कार्रवाई 7 सितंबर की रात जारी आदेश के बाद सामने आई।
22 मौतों का दावा, आधिकारिक आंकड़ों में अंतर
ताजा स्थानीय रिपोर्टों में बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। इनमें एक ही परिवार के पिता-पुत्र की मौत का मामला भी शामिल है। हालांकि इस संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। PTI आधारित 7 सितंबर के अपडेट में आधिकारिक तौर पर 12 मौतों की पुष्टि थी, जबकि बाद की स्थानीय और अस्पताल आधारित रिपोर्टों में यह संख्या तेजी से बढ़कर 22 बताई गई। Times of India ने भी 22 मौतों का आंकड़ा दिया है, लेकिन इसे गांवों, अस्पताल और अंतिम संस्कार संबंधी सूचनाओं पर आधारित बताते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर अंतिम पुष्टि बाकी थी। इसलिए प्रकाशन में “ताजा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक 22 मौतें” लिखना ज्यादा तथ्यात्मक रहेगा।
112 मरीजों का इलाज जारी होने की जानकारी
स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक शराब पीने के बाद बीमार पड़े 112 मरीजों का सागर और भोपाल के अस्पतालों में इलाज चल रहा है और कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि अस्पताल में भर्ती मरीजों की कुल संख्या को लेकर भी अलग-अलग अपडेट आए हैं। एक अन्य रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम के दौरान 160 से अधिक लोगों के अस्पताल पहुंचने की बात कही गई है। इसका अंतर संभवतः cumulative admissions और वर्तमान में उपचाराधीन मरीजों की संख्या के कारण हो सकता है।
शराब ठेकेदार समेत 30 लोगों पर FIR
पुलिस कार्रवाई में शराब ठेकेदारों और अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों पर शिकंजा कस रहा है। पुलिस के अनुसार अलग-अलग मामलों में कुल 30 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें शराब की बिक्री और सप्लाई से जुड़े लोग भी शामिल हैं। अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि शराब कहां बनी, किसके जरिए सप्लाई हुई और गांवों तक किस नेटवर्क से पहुंची, इसका पता लगाया जा सके।
225 लीटर से ज्यादा शराब जब्त
पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार आरोपियों से बड़ी मात्रा में संदिग्ध शराब भी बरामद की गई है। ताजा स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब 225.12 लीटर देशी शराब जब्त की गई है। पुलिस इसकी सप्लाई चेन, पैकिंग और वैधानिकता की जांच कर रही है।
शराब में Methanol की जांच
प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच से जुड़े कुछ अपडेट में मृतकों के शरीर में Methanol यानी methyl alcohol poisoning के संकेत मिलने की बात सामने आई है।
Methanol बेहद जहरीला औद्योगिक अल्कोहल है। इसकी थोड़ी मात्रा भी गंभीर विषाक्तता, दृष्टि हानि, बेहोशी और मौत का कारण बन सकती है।
लेकिन सभी मृतकों का कारण एक जैसा था या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही की जानी चाहिए।
Collector ने दिए Magisterial Inquiry के आदेश
सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संदिग्ध शराब कहां तैयार हुई, उसका भंडारण कहां किया गया, गांवों तक सप्लाई किसने पहुंचाई और शराब की बिक्री के दौरान किन विभागों या अधिकारियों से लापरवाही हुई। जांच में यह भी तय किया जाएगा कि मौतों की वास्तविक वजह संदिग्ध शराब थी या कोई अन्य कारण।
Lalitpur Connection पर MP-UP पुलिस आमने-सामने
शराब की सप्लाई को लेकर शुरुआत में उत्तर प्रदेश के ललितपुर कनेक्शन की बात सामने आई थी। सागर पुलिस ने जांच में ललितपुर से जुड़े नेटवर्क की आशंका जताई। लेकिन ललितपुर पुलिस और आबकारी विभाग ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। ललितपुर पुलिस का कहना है कि यदि सागर पुलिस के पास कोई ठोस तथ्य हैं तो उन्हें साझा किया जाना चाहिए। इसलिए UP से शराब सप्लाई होना अभी अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं है।
पहले भी कई अधिकारियों पर गिरी गाज
इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी थी। आबकारी विभाग के अधिकारियों और पुलिस कर्मचारियों पर निलंबन तथा अटैचमेंट जैसी कार्रवाई की गई है। अब SDM और SDOP को हटाए जाने से सरकार ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा केवल शराब कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय लापरवाही भी जांच के घेरे में होगी।
पूरे MP में अवैध शराब के खिलाफ अभियान
सागर की घटना के बाद आबकारी विभाग ने प्रदेशभर में अवैध और संदिग्ध शराब के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को शराब के निर्माण, परिवहन, भंडारण और बिक्री पर विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई है।
गांवों में अब भी दहशत
बंडा क्षेत्र के प्रभावित गांवों में घटना के बाद डर और आक्रोश दोनों का माहौल है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि संदिग्ध शराब पीने के बाद उल्टी, चक्कर, आंखों से धुंधला दिखाई देना, बेहोशी या दूसरी समस्या हो तो तुरंत अस्पताल पहुंचें। इस मामले में मौतों और मरीजों की संख्या लगातार बदल रही है, इसलिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अगले आधिकारिक अपडेट पर नजर बनी हुई है।